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गुरु की कृपा से जीवन में गुणात्मक परिवर्तन होता है-संत बुच्चा जी

ब्यूरो 07-12-2021

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Feature Image 2021

सुशील कुमार गुप्ता

मतसा(गाजीपुर)। स्थानीय क्षेत्र स्थित सब्बलपुर कला रामलीला मैदान में धनुष यज्ञ मेला के तहत आयोजित त्रिदिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन गृहस्थ संत बुच्चा जी ने कहा कि जब गुरु की, साधु अथवा संत की कृपा प्राप्त होती है तब जीवन में गुणात्मक परिवर्तन होता है या यों कहें की जीवनी ही उलट जाता है।

लंका प्रवेश के समय जब लंकिनी ने हनुमान जी को रोका तो हनुमान जी उसके सिर पर मुष्टिक प्रहार किया चुॅंकि हनुमान जी संत हैं सो इनका स्पर्श पाते ही जो लंकिनी हनुमान जी को जिंदा ही खा जाने की बात कर रही थी वही सत्संग की महिमा का वर्णन करने लगी लंकिनी ने कहा कि सत्संग की महिमा और आनंद की तुलना में स्वर्ग एवं संचार के सुख बहुत ही कमतर हैं। भगवान की कृपा जिसको मिल जाती है उस पर शत्रु अनुकूल, विष भी अमृत तुल्य और अगम्य भवसागर गाय के खुर के समान सहजता से लंघन करने योग्य बन जाता है संत मिलन की ही महिमा है कि रत्नाकर नामक लूटेरा जो राहगीरों को लूट मारकर अपना एवं अपने परिजनों का पेट पालता था वही उल्टा नाम जपकर ही, तपकर ब्रह्माषि वाल्मीकि के उपाधि को प्राप्त किए यहां तक कि अयोध्या की रानी भगवान राम की अर्धांगिनी सीता इन्हीं वाल्मीकि के आश्रम में अपने पुत्रों को जन्म दी और उनके बालकों का शिक्षण प्रशिक्षण बाल्मीकि आश्रम में ही हुआ। वही राधेश्याम चौबे ने राम चरित्र मानस की चौपाई पूछे उर घुपति कथा प्रसंगा सकल लोक जग पावन गंगा की अत्यन्त ज्ञानवर्धक कथा का वर्णन करते हुए कहा कि राम कथा सुनने से मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है रामकथा के क्रम में श्रुति स्मृति आगम निगम के पूर्व व्यवस्थाओं को ध्यान में रखने के साथ राम कथा रूपी सरिता मृत की धारा को अनुभूति रुपी रस में डुबोकर पावन गंगा की तरह लोक कल्याणी व्याख्या प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया उन्होंने आगे कहा कि माता सीता की उत्पत्ति का वर्णन राम कथा के जरिए श्रद्धालुओं को सुना कर उन्हें धर्म के प्रति आकर्षित किया वहीं वे चौपाई के माध्यम से बताया कि श्री राम यज्ञ से उत्पन्न ऋषि संतति के प्रतिक है सीता जी जनक के द्वारा चलाए गए हल से प्रकट हुई| आज त्रि दिवसीय श्री राम कथा के विश्राम दिवस पर सभी सम्मानित कथावाचकथावाचकों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया इस ज्ञान यज्ञ में भागवताचार्य चंद्रेश महाराज राधेश्याम चौबे कैलाश और विनोद श्रीवास्तव ने भी कथा अमृत पान कराया कथा मंच का संचालन व्यास रामदत्त यादव ने किया।

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