Skip to content
City Super Fast News

City Super Fast News

Your Voice…

Primary Menu

एक दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान वितरित किया गया गेहूँ की नवीन प्रजाति का बीज

ब्यूरो 22-11-2022

हमारे पोस्ट को करें:

  • Share on X (Opens in new window) X
  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Share on Tumblr (Opens in new window) Tumblr
  • Share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
IMG-20221122-WA0013

गाजीपुर। जनपद स्थित आंकुशपुर कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के अंतर्गत संचालित योजना के तहत जनपद के चयनित विकास खंड के प्रगतिशील कृषकों को गेहूँ की नवीन प्रजाति डी बी डब्लू 187 एवं 222 का बीज गेहूँ प्रदर्शन एवं प्रजाती मुल्यांकन योजना अतंर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान वितरित किया गया।

उक्त अवसर पर केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ आर सी वर्मा ने किसानो को इन प्रजातियों के बारे में बताया कि डी बी डब्लू 187 के पौध की ऊंचाई 103 से.मी. जो 120 दिन में पक कर तैयार होती है तथा और इसकी औसत उपज 61.3 कु./हे. के साथ ही यह गेहूँ की एक मात्र प्रजाति है जिसमें आयरन 43.1 पी.पी.एम. तक उपलब्ध होता हैं। वही डी बी डब्लू 222 पौध की ऊंचाई 100 से.मी. होती है एवं यह 142 दिन में तैयार हो जाती है, तना मजबूत होने से गिरने के प्रति सहिष्णु है और इस प्रजाति की औसत उपज – 65 कु./हे. है। यदि किसान भाई समय से बुवाई कर सभी प्रबंधन समुचित ढंग से करे तो इन प्रजातियों से 72 से 82 प्रति हे0 तक का, जो कि इन प्रजातियों की अधिकतम उत्पादन क्षमता है; प्राप्त कर सकते है। प्रशिक्षण के दौरान डॉ जे पी सिंह वरिष्ठ वैज्ञानिक ने किसानों को गेहूँ की फसल उत्पादन एवं प्रबंधन की जानकरी देते हुए कहा कि यदि किसान भाई बुवाई का कार्य नवम्बर के अंतिम सप्ताह तक अवश्य कर ले क्योंकि यदि बुवाई दिसंबर या इसके बाद में करते है तो प्रति सप्ताह 3 से 4 कु० उत्पादन में कमी होती है। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ नरेन्द्र प्रताप ने किसानों को संबोधित करते गेहूँ बीज उत्पादन की तकनीकी की जानकारी देते हुए कहा की कैसे किसान भाई अपने प्रक्षेत्र पर बीज का उतपादन कर अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। मृदा वैज्ञानिक डॉ अविनाश राय ने किसानों को मृदा परिक्षण के महत्व एवं विधि पर प्रकाश डाला और गेहूँ की अच्छी पैदावार के लिए उर्वरकों के संतुलित मात्रा, प्रयोग की विधि एवं समय की जानकरी प्रदान किया साथ ही कृषि अभियंत्रण के वैज्ञानिक डॉ शशांक शेखर ने कृषि में यंत्रीकरण के महत्त्व पर प्रकाश देते हुए गेहूँ की बुवाई के लिए सीड ड्रिल, जीरो फ़र्टि कम सीड ड्रिल, सुपर सीडर के प्रयोग एवं सावधानियों को बतालातें हुए कहा की मशीन से बुवाई करने से पौधे को जमाव के समय उर्वरक प्राप्त होता है जिससे उनका विकास अच्छा होता है, पौधा स्वाथ्य एवं पैदावार में वृद्धि होती है।

संबंधित समाचार

Post navigation

Previous: गृहस्थ आश्रम ही जीवन का मूल है-कथा वाचक कमला शर्मा
Next: बैठक में जिला सहकारी बैंक के जीएम के अनुपस्थित होने पर डीएम ने स्पष्टीकरण का दिया निर्देश

हो सकता है आप चूक गए हों

CSF-Logo-500x280

दहेज उत्पीड़न मामले में फरार दंपती गिरफ्तार, इलाके में मचा हड़कंप

ब्यूरो 09-03-2026
IMG-20260309-WA0012

दहेज उत्पीड़न मामले में वांछित पति-पत्नी गिरफ्तार

ब्यूरो 09-03-2026
IMG-20260309-WA0011

राजकिशोर सिंह महाविद्यालय में एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर का शुभारंभ

ब्यूरो 09-03-2026
IMG-20260308-WA0004

नेशनल मोबाइल शॉप में भीषण आग, डेढ़ से दो करोड़ का सामान जलकर खाक

ब्यूरो 08-03-2026
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.