गाजीपुर| जनपद में गो आश्रय स्थलों पर “पराली दो, खाद लो” अभियान तेज़ी से चलाया जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी गाजीपुर ने बताया कि धान कटाई के इस मौसम में खेतों में बड़ी मात्रा में पुआल फसल अवशेष के रूप में उपलब्ध है। किसान प्रायः पराली को खेतों में जला देते हैं, जिससे वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न होती है। इस समस्या के समाधान के लिए जिलाधिकारी गाजीपुर के निर्देशानुसार 1 नवंबर से 15 दिसंबर 2025 तक विशेष पराली संग्रह अभियान संचालित किया जा रहा है।
अभियान के तहत किसानों के खेतों से पराली एकत्र कर उसे स्थानीय निराश्रित गौशालाओं में संग्रहित किया जा रहा है। पराली उठाने हेतु आवश्यक खर्च की व्यवस्था मनरेगा या वित्त आयोग द्वारा की जाएगी। पंचायतीराज अनुभाग-1 के शासनादेश दिनांक 02.06.2020 के अनुसार, किसानों के खेतों से गेहूं भूसा, धान पुआल एवं अन्य कृषि अवशेष गौशालाओं तक पहुंचाने का खर्च राज्य वित्त आयोग की धनराशि से वहन किए जाने की अनुमति है। गोआश्रय स्थलों में पराली को हरे चारे के साथ मिश्रित कर पशुओं के चारे में उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पराली को ठंड से बचाव हेतु बिछावन के रूप में इस्तेमाल करना भी लाभकारी होगा। किसानों को पराली देने के बदले गोबर से निर्मित खाद उपलब्ध कराने का प्रावधान भी किया गया है। अभियान के प्रभावी संचालन का परिणाम है कि 26 नवम्बर 2025 तक जनपद के 60 गो आश्रय स्थलों में कुल 315 क्विंटल पराली संग्रहित की जा चुकी है।