जमानियाँ (गाजीपुर)। स्थानीय क्षेत्र के अग्रणी शिक्षण संस्थान सेंट मेरीज़ स्कूल में शुक्रवार को वार्षिकोत्सव “कला-संगम 2025” उत्साहपूर्वक एवं धूमधाम से मनाया गया। जिसमें बच्चों ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डीएफओ अजीत प्रताप सिंह, वाराणसी प्रांत के विशप डॉ यूजीन जोसेफ, प्रधानाचार्या सिस्टर मिनी फिलिप ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
तत्पश्चयात इन्द्रधनुषी रंग से सुसज्जित मंच पर नन्हें-मुन्हें बच्चों ने डांस, नाटक, कौवाली व अपने स्वर और व्यंजना की शानदार प्रस्तुति कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वही बच्चों ने पर्यायवरण को शुद्ध करने, ग्लोबल वार्मिंग से हो रहे नुकसान, वसुधैव कुटुम्बकम की भावना विकसित करने व भ्रूण हत्या रोकने के प्रति लोगों को जागरूक किया, तथा ‘अपने मॉ बाप का दिल न दुखा’ कौवाली के द्वारा समाज को रचनात्मक संदेश दिया। अंतरिक्ष के बारे में बारीकियों से जानकारी देकर लोगों को ज्ञानवर्धन किया। “जिद” कार्यक्रम का मंचन कर भ्रूण हत्या रोकने व महिला सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया साथ ही ओद्रा नृत्य, राजस्थान की आत्मा, चैम्पियन ऑफ करेज, भरत नाट्यम आदि कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव विभोर करने के साथ ही समाज को संस्कार से परिपूर्ण करने व देश की विविधता में एकता के संदेश को मजबूती से रखा। मुख्य अतिथि डीएफओ अजीत प्रताप सिंह ने अभिभावकों व छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा से ही संस्कार पल्लवित होता है। अपनी महत्वकांक्षा को बच्चों के ऊपर न थोपे बल्कि उनका मनोबल बढ़ाने का कार्य करें। असफलता बड़े भविष्य का परिचायक हो सकता है। बच्चों को मनोवृत्ति के अनुसार शिक्षा देने की आवश्यक्ता है। तभी बच्चा सफलता की कहानी लिख पायेगा। आगे उन्होंने कहा कि मोबाइल व लैपटॉप की दुनिया से बाहर निकलकर बच्चों को किताबों से पढ़ने की जरूरत है। किताबों से अध्ययन करके ही संस्कार युक्त शिक्षा के साथ ही सफलता प्राप्त हो सकती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ यूजीन जोसेफ बच्चें परिवार के सुरम्य प्रकाश है, जिसे विद्यालय ज्ञान रुपी गंगा से आक्षादित करके संस्कार युक्त बनाकर समाज का अग्रज बनाने का कार्य करता है। यह विद्यालय लगातार ऊचाईयों को छू रहा है, जहाँ सफलता की नवीन कहानियाँ लिखी जा रही है। प्रधानाचार्या सिस्टर मिनी फिलिप ने कहा कि बच्चों के नैतिक मूल्यों को विकसित करने में माता-पिता सहित शिक्षक की महती भूमिका रहती है। कला-संगम द्वारा बच्चों की प्रतिभा निखारने का कार्य किया गया है। उक्त मौके पर सिस्टर शीला, सिस्टर मीरा, मिस्टर जॉय, रागिनी सिंह, डिम्पी सिंह, आदिति कुमारी, प्रदीप लाकरा, नरेन्द्र गुप्ता, रमेश कुमार, बलवीर सिंह, अमरेन्द्र सिंह सहित विद्यालय के शिक्षक, अभिभावक और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन बच्चों ने किया।