जमानियां। स्थानीय स्टेशन बाजार स्थित डॉ. सुरेश राय के निवास पर रविवार को सौरभ साहित्य परिषद, बरूईन (जमानियां) के तत्वावधान में एक भव्य एवं भावपूर्ण कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद साहित्यिक वातावरण और भी प्राणवान हो उठा।
कवियों ने अपने काव्य-पाठ से बांधा समां
कार्यक्रम का शुभारंभ गाजीपुर जनपद के ख्यात प्रबंध-काव्यकार कामेश्वर द्विवेदी ने सरस्वती वंदना और अपने प्रबंध काव्य “उर्मिलेश” से छंद पाठ करते हुए किया। उनकी रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद नवगीतकार डॉ. अक्षय पांडेय ने मां और पिता पर आधारित मुक्तक छंदों का भावपूर्ण पाठ किया, जिससे उपस्थित श्रोता भाव-विभोर हो उठे। पूर्वांचल के राष्ट्रीय स्तर के चर्चित कवि और ग़ज़लगो मिथिलेश गहमरी ने अपनी ग़ज़लों और रुबाइयों से कार्यक्रम को नई ऊँचाइयों पर पहुंचा दिया।
हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जमानिया के वरिष्ठ हिंदी आचार्य प्रो. अखिलेश कुमार शर्मा ‘शास्त्री’ ने श्रीराम के वनगमन पर अत्यंत सुंदर छंद प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर श्रोता भावलोक में डूब गए।
अध्यक्षीय वक्तव्य ने छू लिया दिल
सौरभ साहित्य परिषद के संरक्षक व वरिष्ठ शिक्षाविद् राजेंद्र सिंह, जिन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता भी की, ने अपनी प्रसिद्ध रचना “सिसक रही है रामदुलारी” सुनाकर मध्यमवर्गीय परिवार की करुण स्थिति को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति से कई श्रोताओं की आंखें नम हो गईं।
संचालन और समापन
कार्यक्रम का संचालन मिथिलेश गहमरी ने कुशलता से किया। अंत में मेजबान डॉ. सुरेश राय ने सभी आमंत्रित कवियों, साहित्यप्रेमियों और दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया।nकार्यक्रम में डॉ. मदन गोपाल सिंहा, उमाशंकर सिंह, उमाकांत सिंह, जितेंद्र सिंह, संसार सिंह, डॉ. अभिषेक तिवारी सहित क्षेत्र के अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
