वाराणसी(मुगलसराय)| जनजातीय समाज के महान स्वतंत्रता सेनानी, धरती आबा वीर बिरसा मुंडा की स्मृति और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित वीर बिरसा मुंडा साइक्लोथॉन के सातवें दिन साइक्लिंग दल ने सासाराम से वाराणसी तक का सफल एवं चुनौतीपूर्ण सफर तय किया। यह चरण अब तक का सबसे लंबा और कठिन चरण रहा। प्रस्थान से पूर्व साइक्लोथॉन दल ने सासाराम स्थित शेरशाह सूरी के ऐतिहासिक मकबरे का भ्रमण किया, जो 16वीं शताब्दी की स्थापत्य कला की एक महत्वपूर्ण धरोहर है। उत्तर प्रदेश में प्रवेश के दौरान साइक्लोथॉन दल का यूपी–बिहार सीमा पर 91 यूपी बटालियन एनसीसी द्वारा आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (CATC) में प्रशिक्षणरत एनसीसी कैडेट्स द्वारा भव्य स्वागत किया गया। कर्नल अमर सिंह, कमांडिंग ऑफिसर, 91 यूपी बटालियन एनसीसी के नेतृत्व में कैडेट्स ने साइक्लोथॉन दल के साथ साइक्लिंग करते हुए उन्हें वाराणसी तक एस्कॉर्ट किया।
इस अवसर पर कर्नल अमर सिंह ने कहा कि “वीर बिरसा मुंडा साइक्लोथॉन युवाओं में देशभक्ति, अनुशासन और सामाजिक चेतना को जागृत करने का सशक्त माध्यम है। एनसीसी कैडेट्स के लिए यह अभियान प्रेरणादायी अनुभव है।”


साइक्लोथॉन दल को स्वामी हरसेवनंद पब्लिक स्कूल, बेनपुरवा, रमना (वाराणसी) में एनसीसी ग्रुप मुख्यालय, वाराणसी ‘ए’ ग्रुप के डिप्टी ग्रुप कमांडर द्वारा फ्लैग-इन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य, विद्यालय प्रशासन के वरिष्ठ सदस्य, 91 यूपी बटालियन एनसीसी के अधिकारी एवं स्टाफ तथा CATC में प्रशिक्षणरत एनसीसी कैडेट्स उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डिप्टी ग्रुप कमांडर ने अपने संबोधन में कहा कि “वीर बिरसा मुंडा जैसे महान नायकों की स्मृति में आयोजित यह साइक्लोथॉन राष्ट्र की एकता, सांस्कृतिक समरसता और युवाओं की सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। स्वागत समारोह के दौरान एक संक्षिप्त सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मेजबान कैडेट्स द्वारा स्वागत प्रस्तुति दी गई। इसके उपरांत साइक्लोथॉन दल ने झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करती हुई प्रस्तुति दी। इस अवसर पर दोनों पक्षों के मध्य स्मृति चिह्नों का आदान-प्रदान भी किया गया। वीर बिरसा मुंडा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान जनजातीय नायक थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन और ज़मींदारी प्रथा के विरुद्ध संघर्ष कर जनजातीय समाज को जागरूक किया। उलगुलान आंदोलन के माध्यम से उन्होंने सामाजिक सुधार, आत्मसम्मान और स्वाधीनता का संदेश दिया। यह साइक्लोथॉन उनके विचारों और आदर्शों को युवाओं तक पहुँचाने का एक सार्थक प्रयास है। वाराणसी में रात्रि विश्राम के उपरांत साइक्लोथॉन दल अस्सी घाट पर प्रातःकालीन गंगा आरती का साक्षी बनेगा तथा इसके पश्चात दिवस 8 पर मिर्ज़ापुर की ओर प्रस्थान करेगा।
