गाजीपुर। जिलाधिकारी अविनाश कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में अभियोजन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न न्यायालयों में निस्तारित मामलों, सजा, जमानत और वारंट की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि सत्र न्यायालय में कुल 27 वाद निस्तारित हुए, जिनमें से 10 मामलों में सजा हुई, जबकि 15 मामलों में अभियुक्त रिहा हुए और 13 मामलों में अभियुक्त पक्षद्रोहिता के कारण रिहा हो गए। वहीं अन्य अधिनियमों के अंतर्गत 11 वाद निस्तारित हुए, जिनमें सभी 11 मामलों में अभियुक्तों को सजा सुनाई गई। समीक्षा के दौरान बताया गया कि कुल 605 वारंट जारी किए गए, जिनमें से 502 वारंट तामील किए गए। वहीं 414 गवाह न्यायालय में उपस्थित हुए, जिनमें से 394 गवाहों का परीक्षण हुआ जबकि 20 गवाहों का परीक्षण नहीं हो सका, क्योंकि पीठासीन अधिकारी अवकाश पर थे तथा अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे।
बैठक में यह भी बताया गया कि 221 जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किए गए, जिनमें से 162 जमानत स्वीकृत हुईं जबकि 59 प्रार्थना पत्र अस्वीकृत कर दिए गए। जिलाधिकारी ने जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) और लोक अभियोजकों को निर्देशित किया कि जिन मामलों में अभियुक्त रिहा हुए हैं, उनकी पुनः विधिवत समीक्षा की जाए। यदि सरकारी हित में आवश्यक हो तो अपील का प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत किया जाए। साथ ही एडीजीसी जयप्रकाश सिंह और अखिलेश सिंह को भविष्य में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी शासकीय अधिवक्ताओं की एक वर्ष की परफॉर्मेंस शीट तैयार कर उनकी व्यक्तिगत पत्रावली में रखी जाए, ताकि नवीनीकरण के समय उसका संज्ञान लिया जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि गंभीर धाराओं वाले मामलों में अधिक से अधिक जमानत प्रार्थना पत्रों को अस्वीकृत कराने का प्रयास किया जाए और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए उपलब्ध सभी साक्ष्यों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।बैठक में मुख्य राजस्व अधिकारी आयुष चौधरी, अभियोजन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) उपस्थित रहे।