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भारत वर्ष खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने-डॉ जेपी सिंह

ब्यूरो 08-07-2022

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गाजीपुर। फसल उत्पादन के लिए आवश्यक घटकों में से एक प्रमुख एवं अति आवश्यक घटक है मृदा; यह किसी भी तरह के फसलों, पेड़, पौधों, सब्जीयों के अच्छी उत्पादन के साथ ही लाखो असंख्य सूक्ष्म जीवों का जीवन आधार है। अतः यह जरूरी है कि इस मिट्टी की संरचना एवं संगठन को ख़राब होने से सुरक्षित किया जाये जिससे हम अपने वर्त्तमान एवं भविष्य की कृषि सुरक्षित रहे और उत्पादन में निरंतर वृद्धि होती रहे और भारत वर्ष खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने।

इस को ध्यान में रखकर किसानो को जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष विश्व मृदा दिवस का आयोजन किया जाता है जिससे किसान भाई अपने मिट्टी की अवस्था के प्रति जागरूक बने और उचित वैज्ञानिक सलाह के आधार अपनी खेती करे और गुणवत्ता युक्त फसल उत्पादन ले। उक्त वक्तव्य कृषि विज्ञान केंद्र आकुशपुर, गाजीपुर के प्रभारी अधिकारी डॉ जे. पी. सिंह द्वारा केंद्र के प्रक्षेत्र मृदा जाच के समय दिया गया। मृदा वैज्ञानिक डॉ आविनाश कुमार राय ने कहा कि केंद्र के पुरे प्रक्षेत्र का नमूना इकट्ठा कर एस. टी. एफ. आर. मशीन (स्वायल टेस्ट फ़र्टिलाइज़र रेकमनदेशन) की सहायता से कर प्रक्षेत्र के मृदा की अवस्था की जानकरी के बाद ही उर्वरकों / खादों का उपयोग किया जायेगा। डॉ राय ने बताया की इस मशीन की सहायता से मृदा में उपस्थित कार्बनिक पदार्थ सहित तेरह प्रकार के पोषक तत्वों एवं उनकी उपलब्ध मात्र की जानकारी मिलती है, जिसके आधार पर उर्वरक/ खाद की मात्र की गणना आगामी फसल के लिए कर सकते है। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ अमरेश कुमार ने कहा कि मृदा में जीवांश कार्बन की मात्र को संरक्षित रखने के लिए गोबर की खाद या वरमी कम्पोस्ट का उपयोग करना चाहिय। डॉ नरेन्द्र प्रताप ने मृदा में पाए जाने वाले सोलह पोषक तत्वों के बारे में और उनके आभाव का फसल के ऊपर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी दी। डॉ शशांक ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया और कहा इस विधा को अपनाने से हमारी रासायनिक उर्वरक/ खाद पर से निर्भरता कम होगी और मृदा के उर्वरकता में वृद्धि होगी। डॉ शशांक शेखर ने कहा की हमारे कृषक भाई गर्मी की गहरी जुताई अवश्य करे क्योकि इस क्रिया को करने से मृदा में उपस्थित खरपतवार के बीज, रोग कीट के कारक आदि जिनको नियंत्रित करने के लिय रासायनिक दवाओं का अंधाधुन्द प्रयोग होता है वो कम हो जायेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

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