गाजीपुर| जनपद न्यायालय, गाजीपुर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ माननीय जनपद न्यायाधीश श्री धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर उन्होंने लोक अदालत की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह त्वरित, सुलभ एवं स्थायी न्याय का प्रभावी माध्यम है, जिससे समय की बचत होती है और वर्षों से लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव होता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में निस्तारित मामलों के विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे विवाद का स्थायी समाधान हो जाता है। साथ ही, उन्होंने अधिकाधिक मामलों के निस्तारण तथा सुलह-समझौते के माध्यम से आपसी वैमनस्य समाप्त करने का आह्वान किया।
नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत एवं अपर जिला जज (कोर्ट संख्या–1) श्री शक्ति सिंह ने बताया कि यह लोक अदालत किसानों, मजदूरों एवं सीमा पर तैनात जवानों को समर्पित है। अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय का लाभ पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रकरणों में अनावश्यक मुकदमेबाजी से उत्पन्न तनाव को समाप्त कर सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने में लोक अदालत की सक्रिय भूमिका है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/सचिव, पूर्णकालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गाजीपुर श्री विजय कुमार–IV ने जानकारी दी कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1,39,292 मामले निस्तारण हेतु नियत थे, जिनमें से सुलह-समझौते एवं संस्वीकृति के आधार पर 1,24,075 वाद अंतिम रूप से निस्तारित किए गए। विभिन्न न्यायालयों द्वारा 13,462 तथा बैंकों एवं अन्य विभागों द्वारा 1,10,613 मामलों का निस्तारण हुआ। परिवार न्यायालय द्वारा 03 विवाहित जोड़ों में सुलह कराकर विदाई कराई गई। बैंकों के लगभग ₹10 करोड़ 95 लाख के मामलों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत के अवसर पर वृद्धा, दिव्यांग एवं विधवा पेंशन हेतु शिविर तथा मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक उपस्थित रहे। साथ ही बिजली बिल, गृहकर, जलकर एवं अन्य सामाजिक योजनाओं से संबंधित पांडाल लगाए गए। जनपद न्यायाधीश द्वारा कुछ दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर एवं बैसाखी का वितरण भी किया गया।
उल्लेखनीय है कि जनपद का सबसे पुराना आरबिट्रेशन वाद संख्या–13/2014 (महिन्द्रा एंड महिन्द्रा बनाम माता अमरावती विद्यालय), जो लगभग 11 वर्षों से लंबित था, को सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित किया गया। यह वाद अपर जिला जज प्रथम श्री शक्ति सिंह के न्यायालय में लंबित था। सुलह के उपरांत प्रकरण के अधिवक्ताओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पी.ओ. (एम.ए.सी.टी.) श्री संजय हरिशुक्का, अपर जिला जजगण श्री अली रज़ा, श्री अभिमन्यु सिंह, श्री रामअवतार प्रसाद, श्री अलख कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती नूतन द्विवेदी, सिविल जज (सी.डी.) श्री अमित कुमार, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री दीपेन्द्र कुमार गुप्ता, सिविल जज (सी.डी.)/एफ.टी.सी. श्रीमती अर्चना, सिविल जज (जूनियर डिवीजन) श्री बेतांक चौहान, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री हार्दिक सिंह सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, बार के पदाधिकारी, न्यायालय कर्मी एवं वादकारी उपस्थित रहे।