जमानियाँ (गाजीपुर)। क्षेत्र के ग्राम जीवपुर स्थित स्वयंभू शिव मंदिर के पास चल रहे 10 दिवसीय श्री सीताराम महायज्ञ के छठे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिकता से ओतप्रोत रामकथा का रसपान किया। कथा प्रवचिका सुश्री अनुराधा दूबे ने कहा कि ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति के अंतःकरण में विद्यमान रहते हैं और उन्हें पाने के लिए मन की शुद्धता व सच्चे ज्ञान की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि आत्मा और परमात्मा का मिलन मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है, जिसकी प्राप्ति गुरु के ज्ञान, सही मार्गदर्शन, निःस्वार्थ भक्ति और ध्यान के माध्यम से संभव है। इस मिलन से जीव सांसारिक मोह-माया, जन्म-मरण के चक्र और दुखों से मुक्त होकर परम आनंद और शाश्वत शांति को प्राप्त करता है।
परम पूज्य चन्द्रेश जी महाराज ने अमृतमयी कथा सुनाते हुए कहा कि सच्चा प्रेम कर्तव्य और पवित्रता के मार्ग से होकर गुजरता है, जिसका श्रेष्ठ उदाहरण भगवान श्रीराम के चरित्र में मिलता है। उन्होंने कहा कि गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए प्रभु श्रीराम ने शिव धनुष भंग कर माता सीता को वरण किया, जो समर्पण, मर्यादा और पवित्र वैवाहिक संबंध का प्रतीक है। यह दिव्य मिलन प्रेम के आगे अहंकार के विनाश का संदेश देता है। कार्यक्रम के दौरान ग्राम प्रधान सुनील सिंह, अध्यक्ष आनन्द पाण्डेय, मनोज राय, रविन्द्र यादव, विजय बहादुर यादव, अशोक राय, भरत राय, रामनगीना राय, दिनेश राय, सियाराम निषाद, रामनरायन निषाद, नईम राईनी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु उपस्थित रहे।