जमानिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया, जिसका कुल आकार 53.47 लाख करोड़ रुपये है। यह जीडीपी का लगभग 13.6 प्रतिशत है और पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान 49.65 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 7.7 प्रतिशत अधिक है। बजट में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत निर्धारित किया गया है, जो सरकार के वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है।बजट में रक्षा क्षेत्र पर विशेष फोकस रखा गया है, जिससे दीर्घकालिक रणनीतिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी राहत देते हुए कैंसर की 17 दवाओं पर मूल सीमा शुल्क में छूट दी गई है। इसके अलावा बुनियादी ढांचे के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान किया गया है, जिससे रोजगार सृजन की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक वृद्धि के बावजूद असमानता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। देश की लगभग 10 प्रतिशत आबादी खपत पर हावी है, जबकि गरीबी, बेरोजगारी और अनौपचारिक श्रम की समस्या जारी है। विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी में योगदान अभी भी लगभग 14 प्रतिशत तक सीमित है, जिससे रोजगार-रहित विकास की स्थिति बन रही है। श्रम-प्रधान मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों की राय
प्रो. अनिल कुमार सिंह, अर्थशास्त्री एवं कृत कार्य प्राचार्य, हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जमानियां ने बजट को संतुलित बताते हुए कहा कि आयकर स्लैब में बदलाव न करना वित्तीय अनुशासन का संकेत है। विनिर्माण को गति देने, आईटी क्षेत्र को बढ़ावा देने और किसानों व युवाओं के जीवन में सुधार के प्रस्ताव बजट को व्यावहारिक बनाते हैं। डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह, सहायक आचार्य (अर्थशास्त्र), हिंदू पी.जी. कॉलेज, जमानियां के अनुसार कृषि के समावेशी विकास, किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा बढ़ाने, भंडारण एवं निर्यात पर जोर से ग्रामीण समृद्धि बढ़ेगी, जिसका सकारात्मक असर जीडीपी पर पड़ेगा। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और उद्यम विस्तार के प्रयास भी सराहनीय हैं।प्रो. शरद कुमार, अर्थशास्त्री एवं पूर्व प्राचार्य, हिंदू पी.जी. कॉलेज, जमानियां ने कहा कि युवाओं, महिलाओं, किसानों, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्रों पर किया गया फोकस स्वागत योग्य है। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आम लोगों को वास्तविक लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर, बजट 2026-27 को ‘विकास और विश्वास’ का बजट माना जा रहा है, जिसमें रक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूती दी गई है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण भारत को और अधिक प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता विशेषज्ञों ने रेखांकित की है।