गाजीपुर| जिलाधिकारी अविनाश कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में अभियोजन की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में अभियोजन कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में अवगत कराया गया कि सत्र न्यायालय में कुल 04 वादों में सजा, जबकि 09 वादों में पक्षद्रोहिता के आधार पर अभियुक्त रिहा हुए। भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत 28 वाद निस्तारित हुए, जिनमें 07 वादों में सजा, 17 वाद सुलह के आधार पर समाप्त, तथा 04 वाद कमिट हुए। अन्य अधिनियमों के अंतर्गत 12 वादों का निस्तारण किया गया, जिनमें 10 वादों में सजा, 01 अभियुक्त रिहा तथा 01 वाद दाखिल दफ्तर हुआ। इस अवधि में कुल 252 वारंट निर्गत हुए, जिनमें से 197 वारंट तामील किए गए। 147 गवाह उपस्थित हुए, जिनमें से 141 गवाहों की परीक्षा हुई तथा 05 गवाह अपरीक्षित रहे, जिसका कारण पीठासीन अधिकारी का अवकाश पर होना एवं अधिवक्ताओं का न्यायिक कार्य से विरत रहना बताया गया। साथ ही, कुल 95 जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल हुए, जिनमें से 04 स्वीकृत तथा 91 अस्वीकृत किए गए।
जिलाधिकारी ने जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) एवं लोक अभियोजकों को निर्देशित किया कि रिहा हुए अभियुक्तों के वादों की पुनः विधिवत समीक्षा की जाए और यदि शासकीय हित में अपील आवश्यक हो तो अपील का प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने भविष्य में पक्षद्रोहिता एवं संदेह के आधार पर रिहाई को रोकने हेतु समुचित एवं प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन वादों में गवाह पक्षद्रोही हो रहे हैं, वहां दोषी गवाहों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाए, ताकि सुधार हो सके। जिन पत्रावलियों में गवाहों के पक्षद्रोही होने की संभावना हो, उनमें लंबी तिथि ली जाए, जबकि जिन वादों में सजा की प्रबल संभावना हो, उनमें निकट तिथि लगवायी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ित को न्याय दिलाना सर्वोपरि लक्ष्य होना चाहिए, इसके लिए वादी के अतिरिक्त उपलब्ध अन्य साक्षियों का भी साक्ष्य कराया जाए। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) दिनेश कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक अभियोजन आनंद कुमार पाण्डेय, क्षेत्राधिकारी नगर शेखर सेंगर, जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) कृपाशंकर राय सहित अन्य संबंधित जनपदस्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।