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आपदा ग्रस्त स्थिति में पशुओं के लिए सस्ता चारा दाना

ब्यूरो 16-06-2022

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गाजीपुर। जनपद स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के पशुपालन अनुभाग द्वारा ब्लॉक मोहम्दाबाद में आफ कैंपस प्रशिक्षण के दौरान गर्मी के मौसम में जिन पशुपालकों के पास हरा चारा नहीं है उन पशुपालकों को जागरूक करते हुए केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक पशुपालन डॉ. ए के सिंह ने पशुपालकों को सलाह दी की गर्मी के मौसम में पशुओ को रोज खिलाने के लिये हरे पौष्टिक चारे एंव दाने की निरन्तर कमी होती जा रही है ऐसे में पौष्टिक सस्ता चारा शीरा यूरिया घोल के माध्यम से भूसे एंव कड़वी को पौष्टिक बनाकर रोज प्रयोग कर सकते है।

10 कि.ग्रा. ज्वार/बाजरा/मक्का की शुष्क कढवी, या कड़वी की जगह भूसा ले सकते है, युरिया 50 ग्राम, गुड़ का शीरा 1.0 लीटर, खनिज मिश्रण(कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, मैग्नीशियम आदि) 50 ग्राम, नमक 30 ग्राम को एक साथ मिलाकर सानी बना सकते हैं इसे पशु बहुत चाव से खाते हैं । यूरिया मिश्रण घोल बनाने के लिये पहले युरिया, लवण मिश्रण एंव नमक को 2 लीटर पानी मे क्रमशः डालकर अच्छी तरह मिलाये फिर उस घोल मे निर्धारित मात्रा में शीरा डालकर अच्छी तरह मिलायें। तदोपरान्त ज्वार/बाजरा/मक्का की शुष्क कढवी या भूसे में उक्त घोल को उलट पलट कर अच्छी तरह मिलाये। घोल तथा चारे का अच्छी तरह मिश्रण हो जाय तो इस मिश्राण को कुछ देर सुखा ले इसके बाद पशुओ की चरही या नाद में डालकर खिलाये। गाय/भैस को अनुमानित 8.0-10.0 कि.ग्रा., 6 माह से ऊपर के बछड़े बछिया को 2.0-4.0 कि.ग्रा. एंव भेड़ बकरी को 500 ग्राम तक खिला सकते है।
एक दुधारू गाय /भैंस को निर्वाह के लिए हर रोज 5 कि.ग्रा भूसा के साथ 12 कि.ग्रा लोबिया या 3 कि.ग्रा भूसा के साथ 20 कि.ग्रा ज्वार/बाजरा/ मक्का के हरे चारे के साथ 1 कि.ग्रा दाना मिश्रण देना चाहिए। अगर हरा चारा उपलब्ध नहीं है तो भूसे के साथ 2.0 किलोग्राम दाना मिश्रण एवं 1.0 किलोग्राम शीरा देना चाहिए। इसके अलावा प्रति लीटर दुग्ध उत्पादन के लिए 350 ग्राम दाना मिश्रण की मात्रा बढ़ाते जाना चाहिए। इसके साथ ही 50 ग्राम खनिज तत्व, 30 ग्राम नमक देना चाहिए।

इस मौसम में संक्रामक बीमारियों गला घोटू लंगडी खुर पका मुंह पका आदि बीमारियों का पशुपालक भाई टीकाकरण अवश्य करा लें जिससे कि आपके पशु सुरक्षित रह सके। इस प्रकार गर्मी यह आपदा ग्रस्त की स्थिति में पशुओं की देखभाल की जाए तो दूध उत्पादन में कमी नहीं हो पाएगी और पशु का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा

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