गाजीपुर। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जून 2026 के दौरान न्यायालयों में निस्तारित मामलों, अभियोजन की प्रगति तथा गवाहों की उपस्थिति एवं पैरवी की समीक्षा की गई।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि जून माह में भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत कुल 58 वादों का निस्तारण हुआ। इनमें 11 मामलों में अभियुक्तों को सजा मिली, एक मामले में अभियुक्त रिहा हुआ, 12 मामलों का निस्तारण सुलह के आधार पर तथा 34 मामलों का कमिट के आधार पर किया गया। वहीं अन्य अधिनियमों के तहत छह मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें दो मामलों में सजा और चार मामलों में अभियुक्तों को रिहा किया गया। बैठक में विभिन्न थानों से संबंधित गंभीर मामलों में न्यायालयों द्वारा सुनाई गई सजाओं की भी समीक्षा की गई। इनमें दहेज हत्या, हत्या तथा पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों में अभियुक्तों को 10 वर्ष के कारावास से लेकर मृत्युदंड तक की सजा सुनाए जाने की जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने प्रभावी पैरवी करने वाले जिला शासकीय अधिवक्ताओं एवं लोक अभियोजकों के कार्यों की सराहना की।
समीक्षा में यह भी बताया गया कि जून माह में कुल 331 सम्मन एवं वारंट जारी किए गए, जिनमें से 238 का तामील कराया गया। उपस्थित 185 गवाहों में से 172 के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए, जबकि कुछ गवाह अधिकारियों के अवकाश एवं अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण परीक्षित नहीं हो सके। सत्र न्यायालयों में भी अधिकांश सम्मनों का सफलतापूर्वक तामील कराया गया। जमानत प्रार्थना पत्रों की समीक्षा में बताया गया कि गंभीर धाराओं से संबंधित कुल 145 प्रार्थना पत्रों में 79 स्वीकृत तथा 66 अस्वीकृत किए गए। बैठक में अपर जिलाधिकारी (भू-राजस्व) ने जिला शासकीय अधिवक्ता एवं लोक अभियोजकों को निर्देश दिए कि जिन मामलों में अभियुक्त रिहा हुए हैं, उनकी पुनः विधिवत समीक्षा कर आवश्यक होने पर अपील का प्रस्ताव तैयार किया जाए। साथ ही पक्षद्रोही होने वाले गवाहों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक माह कम से कम एक मामले की केस डायरी तैयार कर विवेचना में हुई कमियों का विश्लेषण करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में अभियोजन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।