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नवजात को 24 घंटों में 8-12 बार कराएं स्तनपान-डॉ० तारकेश्वर

ब्यूरो 19-11-2020

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गाजीपुर। नवजात शिशु की देखभाल करना उन माताओं के लिए एक बड़ी समस्या होती है जो पहली बार मां बनती हैं और उनके घर में बड़ा-बुजुर्ग नहीं होने से नवजात की देखभाल ठीक तरह से नहीं हो पाती है । जनपद में 15 से 21 नवंबर तक नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया जा रहा है जिसके अंतर्गत माताओं को जन्म लेने वाले शिशुओं को किस तरह से देखभाल करनी चाहिए इसके बारे में विस्तृत रूप से बताया जा रहा है।

जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ तारकेश्वर ने बताया कि पहली बार माता-पिता बनने वाले जोड़ों के लिए अपने नवजात शिशु के साथ शुरूआती कुछ महीने काफी अस्त-व्यस्त हो सकते हैं। आपको नवजात शिशु की देखभाल के बारे में हर तरह की सलाह मिलेगी और उनमें से कुछ एक दूसरे के विपरीत भी होंगी। नवजात शिशु की देखभाल के संबंध में किस सलाह को मानना चाहिए यह तय करना दुविधापूर्ण हो सकता है। नवजात शिशु की देखभाल करना थका देने वाला और चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन यह जीवन के सबसे अद्भुत और अतुलनीय अनुभवों में से एक भी होता है। नवजात शिशु की देखभाल के लिए सुझाव नवजात शिशु की देखभाल करना साफ तौर पर एक चुनौती है। खास तौर पर जब यह आपके साथ पहली बार होता है।
डॉ तारकेश्वर ने बताया कि बच्चे को समय पर स्तनपान करवाना बहुत जरूरी है। एक नवजात शिशु को हर दो से तीन घंटे में स्तनपान करवाया जाना चाहिए, जिसका मतलब है कि आपको 24 घंटों में उसे 8-12 बार स्तनपान कराने की आवश्यकता होती है। शिशु को जन्म के बाद पहले छह महीनों तक केवल माँ का दूध ही पिलाना चाहिए। माँ के दूध में महत्वपूर्ण पोषक तत्व और एंटीबॉडी होते हैं जो बच्चे के स्वस्थ रहने और विकास के लिए आवश्यक होते हैं। शिशु को कम से कम 10 मिनट के लिए स्तनपान कराएं। अपने बच्चे के होठों के पास स्तन को तब तक रखें जब तक वह मजबूती से पकड़ कर चूसने न लगे।
बाल रोग विशेषज्ञ और एसीएमओ डॉ उमेश कुमार ने बताया कि शिशु को दूध पिलाने के बाद उसे डकार दिलाना जरूरी होता है। शिशु दूध पीते समय हवा निगल लेते हैं, जिससे उनके पेट में गैस हो जाती है और यह पेट के दर्द का कारण बनता है। डकार दिलाने से यह अतिरिक्त हवा को बाहर निकालता है, इस प्रकार पाचन में सहायता करता है और दूध उलटने और पेट के दर्द को भी रोकता है। शिशु को धीरे से एक हाथ से अपने सीने से लगा लें। उसकी ठोड़ी आपके कंधे पर टिकी होनी चाहिए। अपने दूसरे हाथ से उसकी पीठ को बहुत धीरे से थपथपाएं जब तक वह डकार ना ले। आप अपने बच्चे के सिर और गर्दन को एक हाथ से सहारा देेते हुए उसे पकड़ रहे हैं। इसका कारण यह है कि उसकी गर्दन की मांसपेशियां अभी तक स्वतंत्र रूप से सिर को संभालने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं हैं। रीढ़ की हड्डी अभी भी बढ़ रही है और मजबूत हो रही है। शिशु की गर्दन केवल 3 महीने की उम्र के बाद अपने दम पर सिर का संभालने में सक्षम होगी। इसलिए नवजात शिशु की देखभाल करते समय उसके सिर और गर्दन को सहारा देने पर ध्यान दें।

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