गाजीपुर। जनपद में शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट व अविस्मरणीय योगदान के कारण बाबू राजेश्वर प्रसाद सिंह को जनपद का ‘मालवीय’ कहा गया। उन्होंने 1950 के दशक में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। जिस समय गाजीपुर जनपद की गिनती पूर्वांचल के पिछडे़ जिलों में की जाती थी उन दिनों में राजेश्वर बाबू ने यहां बीएचयू की तर्ज पर शिक्षण व्यवस्था की शुरुआत कर जनपद को आगे बढ़ाने का भगीरथ प्रयास किये।
उक्त बाते शुक्रवार को पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक ओमप्रकाश सिंह ने जनपद के मालवीय बाबू राजेश्वर प्रसाद सिंह की प्रतिमा अनावरण के अवसर पर मीडिया से दूरभाष पर कही।

उन्होंने कहा कि राजेश्वर बाबू का जन्म 1923 में हुआ था।
छोटी उम्र में ही बड़ी जिम्मेदारी के साथ संघर्ष करते हुए कानून की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1951 में उन्होंने गाजीपुर आकर वकालत की प्रैक्टिस शुरू की तथा 1957 में डिग्री कॉलेज की स्थापना की तथा अपने मेहनत से कालेज को उचाँईयों के उच्चतम शिखर तक ले गये। राजेश्वर बाबू वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ ही कुशल शिल्पी थे। वे नेक दिल, कर्मठ एवं बेहद ईमानदार थे। पीजी कालेज की मान्यता एवं कालेज को आगे बढ़ाने में तथा शिक्षकों की नियुक्ति में काफी ईमानदारी बरते। वे हमेशा जाति, धर्म व महजब से उपर उठकर छात्र व छात्राओं के भविष्य के लिए चिन्तित रहे तथा समाज एवं जनहित में कार्य किए। राजेश्वर बाबू की प्रतिमा का अनावरण हम सबके लिए गर्व की बात है। मै उन्हें इस अवसर पर विनम्र श्रद्धांजलि देता है।