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लंम्‍पी त्वचा (एलएसडी) रोग पशुओं की घातक बीमारी

ब्यूरो 28-09-2022

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गाजीपुर। गाय-भैंसों में लंम्पी त्वचा रोग जिसे की वैज्ञानिक भाषा में एल एस डी वी भी कहते हैं इसके संक्रमण को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र आँकुशपुर, गाज़ीपुर के पशुपालन वैज्ञानिक डा.अमरेश कुमार सिंह ने पशुपालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।

लंम्‍पी दुधारू पशुओं में होने वाला एक विषाणु जनित रोग है जो कैप्री वायरस के द्वारा फैलता है। यह वायरस मक्खियों मच्छरों आदि के काटने से फैलता है। जब संक्रमित पशु को मच्छर और मक्खी काटते हैं तो यह उनके सुड़ में चिपक जाता है और जब यही मच्छर मक्खी किसी स्वस्थ पशु को काटते हैं तो विषाणु उनके शरीर में प्रवेश कर जाता है और पशु संक्रमित हो जाता है। पशुओं के संक्रमित होने से दूध उत्पादन पर इसका खासा प्रभाव पड़ता है और पशु की दूध उत्पादन क्षमता कम हो जाती है गर्भवती गाय/भैंस का गर्भपात भी हो सकता है।
लंबी वायरस से संक्रमित होने के दो-तीन दिन के अंदर पशुओं को हल्के बुखार के बाद 41 डिग्री सेंटीग्रेड के ऊपर तेज बुखार इसका पहला लक्षण है इसके बाद पूरे शरीर में त्वचा के नीचे 2.5 सेंटीमीटर आकार के स्पष्ट दृढ़ गोल पिंड पूरे शरीर में विकसित होता है ये पिंड या गांठें धीरे-धीरे बड़ी होकर गहरे घावों की तरह खुल जाती है और इनसे खुन बहने लगता है इसके परिणाम स्वरूप पशुओं की स्थिति काफी कष्टदायक हो जाती है। इस बीमारी से पशुओं की मृत्यु दर 1-5 % तक है।
अगर कोई गाय /भैंस में वायरस के लक्षण दिखते हैं तो उनको स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें ताकि दूसरे पशुओं में संक्रमण न फैले
पशुओं को स्वच्छ चारा – दाना पानी पिलायें
चारा -दाना स्वस्थ पशुओं को खिलाने के बाद ही बीमार पशुओं को खिलाएं बीमार पशुओं की देखभाल करने वाले व्यक्ति को स्वस्थ पशुओं के पास न जाने दे।
रोगी पशु का दूध बछड़ो को ना पिलाएं और खुद पीने से पहले इस को अच्छी तरह से उबाल ले
लंम्पी वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए पशुओं को स्वदेशी विकसित एलएसडी वैक्सीन जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी लगवायें।
पशुओं को मच्छरों मक्खियों किलनी आदि से बचाने के लिए उनके शरीर पर नाशक दवाओं का प्रयोग करें पशुओं के बांधने के स्थान पर कण्डे जलाकर नीम के सूखे पत्ते, गुगल, कपुर का धुआ सुबह -शाम करें एवं बाड़े में फिनाइल, चूना या सोडियम हाइपोक्लोराइड का छिड़काव करें।
इलाजः पशुओं के घाव को 25 ली.पानी में एक मुठ्ठी नीम की पत्ती का पेस्ट एवं 100 ग्राम फिटकरी मिलाकर गुनगुने पानी से पशुओं को नहलाएं
आधा लीटर नारियल के तेल में एक-एक मुट्ठी नीम, तुलसी, मेहंदी की पत्ती,लहसुन की कली 10 , हल्दी पाउडर 10 ग्राम, सब को तेल में डालकर पका लें फिर इसे ठंडा करके घाव पर लगाएं।
स्वदेशी इलाज में एक-एक मुट्ठी नीम, तुलसी, की पत्ती दालचीनी 5 ग्राम, सोंठ पाउडर 5, काली मिर्च 10 नग इनको एक साथ पीसकर गुड़ में मिलाकर लड्डू तैयार कर ले (यह एक खुराक है ) और इसे सुबह-शाम खिलाएं इससे आराम मिलेगा।
सबसे अच्छा तो यह रहेगा कि पशुओं में लक्षण प्रकट होते ही निकट के पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क कर पशुओं का अति शीघ्र इलाज कराएं।
पशुपालक भाइयों से आग्रह है कि इस बीमारी को हल्के में ना लें प्रभावित पशु का अति शीघ्र इलाज कराएं।

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