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वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर मछली पालक बढ़ा सकते है अपनी आमदनी

ब्यूरो 07-03-2023

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गाजीपुर। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ब्लाक भदौरा के ग्राम सेवराई में आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र आकूशपुर के तत्वाधान में मंगलवार को ”एकीकृत मछली पालन” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा किया गया।

मुख्य अतिथि न प्रगतिशील किसानों से आग्रह किया कि वैज्ञानिकों द्वारा बताए तकनीकियों को अपनाकर मछली पालक अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं मछली पालन के विविध प्रणालिया होती है मछलियों को एक साथ पालने से फायदा होता है।
केंद्र के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर आर सी वर्मा ने इस अवसर पर कि बताया कि कृषि एवं पशुपालन के साथ मछली पालन अपनाकर एकीकृत फसल प्रणाली अपनाने को किसानों से आह्वान किया।

केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ जे पी सिंह ने बताया की मछलियों के आहार ग्रहण करने की आदत अलग-अलग होती है इसलिए तालाब में भारतीय कार्प एवं विदेशी कार्प को एक साथ पालना चाहिए उपरोक्त पद्धति से मछली पालन करने में आहार की बचत भी होती है एवं आहार का भी नुकसान नहीं होता है

इस अवसर कोर्स कोआर्डिनेटर केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक पशुपालन डॉ. ए के सिंह ने मछली पालन करने की तकनीकी जैसे – तालाब के लिये स्थान का चुनाव, तालाब का प्रबंधन, उसमें पालने के लिए मछलियों के अनुपात की तीन पद्धतियों के बारे में बताया।
1- भाकुर 40%, रोहू 30%, नैन 30%
2- भाकुर 20%, रोहू 30%, नैन 30% सिल्वर 30%
3- भाकुर 10%, रोहू 30%, नैन 15% ,सिल्वर 20% कामन कार्प 15%, ग्रास कार्प 10% का चुनाव करने एवं मछलियों के अच्छी बढ़वार के लिए संतुलित आहार के बारे में विस्तृत जानकारी दी तथा बताया कि मछली के साथ कुक्‍कुट पालन एवं मछली के साथ बत्तख पालन की एकीकृत प्रणाली अपना कर कृषक भाई अच्छा लाभ कमा सकते हैं। इस पद्धति में कुक्कुट और बत्तख के मल-मूत्र को मछलिया खा जाती है जिससे मछलियों के आहार में होने वाले खर्च को बचाया जा सकता है। 1.0 हेक्टेयर जल क्षेत्र के लिए लगभग 75 मी.मी. या 150 मि.मी. तक लंबाई की 5000 से 6000 मत्स्य बीज की आवश्यकता होती है। मछलियां साल भर में 1.0 से 1.5 कि.ग्रा. किलोग्राम तक वजन की हो जाती है प्रशिक्षण के दौरान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ नरेन्द्र प्रताप तालाब की मिट्टी की जांच, पानी का पीएच मान एवं गोबर की खाद एवं उर्वरक अमोनियम सल्फेट, सिंगल सुपर फास्फेट, म्यूरेट आफ पोटाश आदि का किस अनुपात में कैसे प्रयोग करना चाहिए।

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