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जिस दिन से हम बिगाड़ की कीमत पर ईमान की बात कहने लगेंगे समाज की समस्याएं सम्मानजनक ढंग से हल हो जाएंगी-प्राचार्य प्रो.शास्त्री

ब्यूरो 31-07-2023

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जमानियां (गाजीपुर)। स्टेशन बाजार स्थित हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय के राजनीतिशास्त्र विभाग के वरिष्ठ आचार्य मदन गोपाल सिन्हा के संयोजकत्त्व में कथाकार प्रेमचंद की जयंती पर उनको श्रद्धा पूर्वक याद करते हुए सफल कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो.शरद कुमार श्रीवास्तव को अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।सम्मान की कड़ी में इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ संजय कुमार सिंह, एएनओ कैप्टन डॉ अंगद प्रसाद तिवारी, दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ राघवेन्द्र पांडेय, कनिष्ठ सहायक राकेश चौबे एवं कार्यालय सहायक राजेश कुमार को उनकी सेवा के सापेक्ष अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.अखिलेश कुमार शर्मा ‘शास्त्री’ के नेतृत्व में महाविद्यालय की मासिक साफ सफाई उपस्थित सभी प्राध्यापक कर्मचारियों द्वारा की गई।
कथा सम्राट प्रेमचंद जी को याद करते हुए डॉ मदन गोपाल सिन्हा ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अगली कडी़ में पूर्व प्राचार्य प्रो.शरद कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रेमचंद अपने समय से आगे के लेखक रहे हैं उनसे आज की पीढी़ को बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है।हिंदी विभाग के सहायक आचार्य बिपिन कुमार,डॉ संजय कुमार राय,डॉ अंगद प्रसाद तिवारी एवं अभिषेक तिवारी ने अपने अपने हिसाब से प्रेमचंद जी के साहित्य पर विचार प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.”शास्त्री” ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि यदि प्रेमचंद के लेखन का मूल्यांकन करना है तो हमें उनके समय के समाज में जाने की परकायाप्रवेश जैसे ज्ञान की आवश्यकता होती है।सतही तौर पर उनके साहित्य को पढ़कर हम महान साहित्यकार को न समझ सकते हैं और न ही कुछ बोल सकते हैं।प्रो.शास्त्री ने प्रेमचंद जी को उनकी जयंती पर सादर नमन करते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘पंच परमेश्वर’ के अंश को उद्धृत करते हुए कहा कि “क्या बिगाड़ की डर से ईमान की बात नहीं कहेंगे” जुम्मन शेख की खाला का यह कथन अगर हमें कहीं छू पाता हो, तो प्रेमचंद को पढ़ना और उन्हें याद करना सार्थक होगा।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हम कहीं-न-कहीं, किसी-न-किसी रूप में ‘पंच परमेश्वर’ की भूमिका में होते हैं।”आसमान से फरिश्ते तो पंचायत करने आएंगे नहीं।”
किसी व्यक्ति द्वारा किए गए ‘अन्याय पर ज़माने को गालियां’ देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेना पर्याप्त नहीं है।
जिस दिन से हम बिगाड़ की कीमत पर ईमान की बात कहने लगेंगे, हमारे आसपास और समाज की ढेर सारी समस्याएं सम्मानजनक ढंग से हल हो जाएंगी और न्यायालयों पर अनावश्यक पड़ने वाला बोझ भी कम हो जाएगा।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ मदन गोपाल सिन्हा ने किया और आभार महाविद्यालय वरिष्ठ प्रो.अरुण कुमार ने किया। महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्यगण उपस्थित रहें।पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार
सोमवार को विद्यारंभ कार्यक्रम की विधिवत शुरुवात प्रो शरद कुमार द्वारा की गई। इस अवसर कनिका अंजली चौहान अनुराधा नर्गिस, ममता, खुशबू आदि उपस्थित रहे। इस आशय की जानकारी महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी अभिषेक तिवारी ने विज्ञप्ति जारी कर दी।

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