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यदि आप अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाना चाहते है तो मैत्री, करूणा, मुदिता और उपेक्षा इन चार भावो को धारण करें-प्राचार्य प्रो शास्त्री

ब्यूरो 23-08-2023

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जमानियाँ (गाजीपुर)। स्थानीय स्टेशन बाजार स्थित हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को हिन्दी विभाग के तत्वाधान में तुलसीदास जयंती के उपलक्ष्य में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कीअध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य अखिलेश कुमार शर्मा शास्त्री ने की।

महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ अंगद प्रसाद तिवारी ने तुलसी जयंती के अवसर पर कहा कि तुलसीदास महान कवि के रूप में पूज्यनीय हैं उनका रामचरितमानस हिन्दी साहित्य ही नहीं वरन विश्व साहित्य की अमूल्य निधि है इस ग्रंथ में श्रीराम के अलौकिक लीला कर आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श मित्र व आदर्श राज्य का परिचय दिया है। तुलसीदास जी अपनी साहित्यिक रचनाओं के कारण आज भी अजर व अमर हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य प्रो शास्त्री ने कहा की तुलसीदास जी का जीवन संघर्ष पूर्ण रहा है। जो जीवन में दुख या संघर्ष से मुकाबला करता है, वह निश्चय ही आगे बढ़ता है। उनका रामचरितमानस अद्भुत ग्रंथ है। इसमें सभी समस्याओं का समाधान है। तुलसी जैसे विरले लोग ही होते हैं जिनकी वाणी में मानव कल्याण की भावना निहित होती है। आगे उन्होंने कहा कि यदि आप अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाना चाहते है तो मैत्री, करूणा, मुदिता और उपेक्षा इन चार भावो को धारण करें। हिन्दी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ संजय कुमार राय ने कहा कि तुलसीदास भक्तिकाल के विशिष्ट कवि रहे हैं उनके जीवन में उनकी पत्नी रत्नावली का महत्वपूर्ण योगदान रहा है तभी वहां सामान्य तुलसी से महान तुलसी बना है उनकी कृतियों में मानव जीवन का आदर्श त्याग मर्यादा सत्य अहिंसा धर्म आदि का व्यापक रूप देखने को मिलता है। यदि रामचरितमानस को व्यवहार का दर्पण कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकों में डॉ संजय कुमार राय, डॉ अमित कुमार, डॉ ओमप्रकाश श्रीवास्तव, विपिन कुमार, महाविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ के प्रभारी प्रो अरूण कुमार के साथ साथ महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं में चांदनी, कात्यायनी उपाध्याय, रेशु उपाध्याय, नीतू, माधुरी, मोनिका, पिंकी सिंह, कीर्ति, त्रिसला साहू, राजेश्वरी, चांदनी, तीरथ साहू, जीतेश्वर, ममता, गीतांजलि आदि छात्र छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के प्राध्यापक अभिषेक तिवारी एवं आभार प्रदर्शन प्रो. अरुण कुमार ने किया।

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