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हड़प कर ली गई संपत्ति और खून पसीने की कमाई में आकाश पाताल का फर्क है – फलाहारी बाबा

ब्यूरो 03-10-2024

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मतसा (गाजीपुर)। अयोध्या से आए गाजीपुर जिले के प्रसिद्ध चंडी माता मंदिर ढढ़नी मे श्रीमद् भागवत कथा करते हुए महामंडलेश्वर फलाहारी बाबा ने 11 वर्ष के उम्र में कन्हैया के गोकुल से मथुरा जाने की करुण कथा करते हुए कहा कि वेदों की श्रुतियां गोपिया कन्हैया से कहती है कि हे कन्हैया आकाश में चंद्रमा एक होता है और धरती पर चकोर अनेक होते हैं प्रत्येक चकोर यही समझता है कि चंद्रमा मेरा है चंद्रमा मेरा है किंतु वास्तविकता यह है कि वह चंद्रमा किसी एक चकोर का नहीं होता है। इसी प्रकार हे कन्हैया तुम्हारे पर सारे विश्व का अधिकार है केवल हम लोगों का नहीं।प्रेम तो वियोग में भी आनंद की अनुभूति करता है किसी इच्छा पूर्ति की अपेक्षा नहीं रखता। प्रेमास्पद के खुशी में ही प्रेमी की खुशी होती है। कंस की दो पत्नी अस्ति एवं प्राप्ति जरासंध की पुत्री थी कंस के मारे जाने पर दोनों अपने पिता जरासंध के पास गई कुपित होकर जरासंध ने 16 बार मथुरा पर चढ़ाई किया किंतु कृष्ण बलराम के द्वारा पराजित होना पड़ा 17वीं बार ब्राह्मणों को वेद पाठ और जप करने के लिए बैठा दिया और कहा कि इस बार यदि मैं विजय प्राप्त नहीं करूंगा तो तुम सबों का सर से धड अलग कर दिया जाएगा भगवान कृष्ण और बलराम ब्राह्मणों की रक्षा के लिए जरासंध के 17वीं बार मथुरा चढ़ाई पर भाग कर समुद्र के अंदर द्वारिका बसाई दो सोने की नगरी है एक रावण की और एक कृष्ण की रावण के सोने की लंका आग से पिघल कर समुद्र में बह गई किंतु कृष्ण की बसाई हुई द्वारिकापुरी वर्तमान समय में आज भी समुद्र के अंदर विद्यमान है ।हड़प कर ली गई संपत्ति और खून पसीने की कमाई में आकाश पाताल का अंतर होता है। धोखे से कमाई हुई संपत्ति सुखी तो कर सकती है किंतु खून पसीना बहा कर कमाई हुई संपत्ति सुखी के साथ-साथ शांति भी प्रदान करती है। रुक्मणी मंगल की चर्चा करते हुए बाबा ने कहा कि पुरुष तो मात्र एक केवल परमात्मा ही है जीवात्मा स्त्री है जीवात्मा रुपी कन्या का विवाह ब्रह्म रूपी वर से हो जाए तो जीवन सफल हो जाता है। विवाह का विधान विधाता के द्वारा बनाया जाता है रुक्मणी जी का विवाह शिशुपाल से तय हुआ किंतु द्वारकाधीश से विवाह संपन्न हुआ। पत्नी का अभिप्राय भोग नहीं तेजस्विता ओजस्विता और शक्ति होता है साधना में सहायिका होती है कर्दम ऋषि के साधना में देवहूति सहायिका बनी तो श्री हरि भगवान विष्णु कपिल मुनी पुत्र के रूप में प्राप्त हुए। देवताओं की माता अदिति ने धर्मोपदेश का आचरण किया तो वामन भगवान का जन्म हुआ। श्रीमद् भागवतकथा में विशेष रूप से सत्येंद्र राय राजेश राय भैरव राय अंबुज राय राम नगीना राय आलोक श्रीवास्तव राजा राय राजा यादव पप्पू चौबे आदि समस्त गांव के लोगों के सहयोग से भागवत कथा सुसंपन्न हो रही है भागवत कथा में ढढ़नी के अलावा बैरनपुर मलसा देवरिया भगीरथपुर नगसर मतसा बेटावर तिवारीपुर से भारी संख्या में श्रोता आकर भागवत कथा का लाभ ले रहे हैं।

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