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लीला के सातवें दिन श्रीराम केवट संवाद, घरनैल द्वारा सुरसरि पार जाने संबंधित लीला का हुआ मंचन

ब्यूरो 05-10-2024

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गाजीपुर। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वावधान में लीला के सातवें दिन 4 अक्टूबर शुक्रवार को शाम 7:00 बजे विश्वेश्वरगंज स्थित पहाड़ खां पोखरा पर श्रीराम केवट संवाद, घरनैल द्वारा सुरसरि पार जाने से संबंधित लीला का मंचन हुआ। लीला प्रारंभ होने से पूर्व कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी, उप मंत्री लव कुमार त्रिवेदी, प्रबंधक मनोज कुमार तिवारी, उप प्रबंधक मयंक तिवारी कोषाध्यक्ष बाबू रोहित अग्रवाल द्वारा श्री राम लक्ष्मण सीता की पूजन आरती की गई। इसके बाद बंदे वाणी विनायकौ आदर्श श्री रामलीला मंडल के कलाकारों द्वारा पूरी भव्यता के साथ लीला की शुरुआत हुई। लीला में दर्शाया गया कि प्रभु श्री राम लक्ष्मण सीता वनवास के दौरान श्रृंगवेरपुर पहुंचकर रात्रि विश्राम के उपरांत दूसरे दिन सुबह निषाद राज केवट से सुरसरि पार जाने के लिए नाव की व्यवस्था करने का आदेश देते हैं। निषाद राज केवट प्रभु श्री राम के आदेश का पालन करते हुए केवट को बुलाकर श्री राम का परिचय देते हुए आदेश देते हैं कि श्री राम लक्ष्मण सीता वन प्रदेश में जाना चाहते हैं इन्हें अपने नाव से नदी पार उतार दो। केवट ने जब सुना कि अयोध्या नरेश महाराज दशरथ के पुत्र श्री राम नदी के तट पर भाई लक्ष्मण पत्नी सीता के साथ खड़े हैं तो वह वहां आकर प्रभु श्री राम को दंडवत करता है और श्री राम का परिचय जानकर कहता हैं कि प्रभु नाव पर बैठाने से पूर्व मैं जल से आपका पांव पखार कर अपने नाव पर बैठाऊगां। क्योंकि मैंने सुना है कि छुअत शिला भई नारी सुहाई, पाहन ते न काठ कठिनाई। प्रभु मैंने सुना है कि महर्षि विश्वामित्र के साथ उनके यज्ञ की रक्षा के लिए आप उनके आश्रम जाते समय रास्ते में एक पत्थर को अपने पैरों से स्पर्श कर दिया आपके चरण स्पर्श से पत्थर नारी में परिवर्तित हो गई। हे नाथ हमारे नाव पर कृपा करें ,यदिआप अपना पैर नाव पर रख दिए तो नाव काठ के बजाय नारी बन जाएगी, इसलिए हे नाथ आप पहले मुझे अपना पैर पखारने का अनुमति दें, तभी मैं आपको नाव पर चढा़ऊंगा।

श्री राम ने केवट की भक्ति युक्त वाणी को सुनकर उन्होंने कहा कि केवट राम राजा यशु पावा। पानी कठोरता भर लै आवा। केवट प्रभु श्री राम के इस वचन को सुनकर के घर से कठौता ले करके आया और अति आनंद उमगी अनुरागा, चरण सरोज पखारन लागा। केवट प्रभु श्री राम के चरण को बड़े ही भाव विभोर होकर पखारा। उसके भक्ति से खुश होकर देवलोक से पुष्पों की वर्षा होने लगती है। उधर केवट प्रभु श्री राम की चरणों को पखारकर अपने पितरों को तार देता है। और प्रभु श्री राम को नाव पर बिठाकर सुरसरि पार ले जाता है। प्रभु श्री राम सुरसरि पार होने के बाद केवट को नाव खेवाई देते है तो केवट कहता है कि अब कछु नाथ न चाहिए मोरे, दीन दयाल अनुग्रह तोरे। हे नाथ मुझे इसकी कोई आवश्यकता नहीं है मल्लाह मल्लाह खेवाई नहीं लेता है मैंने आपको गंगा पार किया। जब मैं आपके धाम आऊंगा तो मुझे आप भवसागर से पार कर दीजिएगा।इतना सुनने के बाद प्रभु श्री राम ने केवट को अविरल भक्ति का वरदान देकर बन प्रदेश के लिए प्रस्थान कर देते हैं। लीला को देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए। इस अवसर पर कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी, मुख्यमंत्री लवकुमार त्रिवेदी, प्रबंधक मनोज कुमार तिवारी को उप प्रबंधक मयंक तिवारी कोषाध्यक्ष रोहित अग्रवाल राम सिंह यादव, राजनसिंह आदि रहे।

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