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108 शिवदास त्यागी महराज के तत्वावधान में शुभारंभ हुआ सात दिवसीय शत्चंडी महायज्ञ

ब्यूरो 10-11-2024

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जमानियां। देवरियां पाहसैयदराजा के दुर्गा मन्दिर परिसर में आज रविवार से सात दिवसीय शत्चंडी महायज्ञ 108 शिवदास त्यागी महराज के तत्वावधान में शुभारंभ हुआ,पहले दिन आज भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गई। शत्चंडी महायज्ञ के पहले दिन निकाली गई यह शोभा यात्रा यज्ञ स्थल से इलाके के विभिन्न गावों,कस्बो,गलि महुल्ले का भ्रमण करते हुए गंगा तट पहुंचा,हाथ सैकड़ो की संख्या में कलश लिए श्रद्धालुओं ने गंगा तट पर पूजन,अर्चन के बाद कलश में जलभरी के पश्चात पुन: वहाँ से हाथ में कलश लेकर विभिन्न गावों का भ्रमण करते हुए यज्ञ स्थल पहुंचे।
जहां वैदिक मंत्रोचार के बीच वेदी ,मंडप पूजन,कन्या पूज‌न आदि का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ,इस शोभायात्रा में भारी संख्या में महिला,पुरूष,बच्चे आदि मौजूद रहे,कलश शोभायात्रा में सैकड़ो की संख्या में चल रहे श्रद्धालु ध्वनि विस्तारक यंत्रों के जरिए भक्ति गीतों पर झूमते हुए चल रहे थे।साथ ही गगनभेदी जयकारा लगा रहे थे,जिससे माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।इस पैदल शोभायात्रा में हाथी,घोडा भी साथ चल रहे थे। आयोजन समिति के अनुसार प्रतिदिन शाम साढे चार बजे से नौ बजे रात्रि तक प्रवचन,नौ बजे रात्रि से बसरह बजे तक रामलीला का मंचन किया जाएगा,जबकि यज्ञ की पूर्णाहुति 18 नवंम्बर को विशाल भंडारे के साथ सुनिश्चित है।इस दौरान शिवदास त्यागी महराज ने कहा कि यज्ञ शब्द यज व धातु से सिद्ध होता है,इसका अर्थ है देव पूजा, संगतिकरण और दान। संसार के सभी श्रेष्ठकर्म यज्ञ कहे जाते हैं। यज्ञ को अग्निहोत्र, देवयज्ञ, होम, हवन, अध्वर भी कहते हैं। कहा कि लोग जानते हैं कि दुर्गंधयुक्त वायु और जल से रोग, रोग से प्राणियों को दुख, सुगंधित वायु और जल से आरोग्य व रोग के नष्ट होने से सुख प्राप्त होता है।कहा कि जहां होम होता है वहां से दूर देश में स्थित पुरुष की नासिका से सुगंध का ग्रहण होता है, कहा कि इतने से ही समझ लें कि अग्नि में डाला हुआ पदार्थ सूक्ष्म होकर व फैलकर वायु के साथ दूर देश में जाकर दुर्गंध की निवृत्ति करता है। अग्निहोत्र से वायु, वृष्टि, जल की शुद्धि होकर औषधियां शुद्ध होती हैं। शुद्ध वायु का श्वास स्पर्श, खान-पान से आरोग्य, बुद्धि, बल व पराक्रम बढ़ता है। इसे देवयज्ञ भी कहते हैं क्योंकि यह वायु आदि पदार्थों को दिव्य कर देता है। कहा कि परोपकार की सर्वोत्तम विधि हमें यज्ञ से सीखनी चाहिए। जो हवन सामग्री की आहूति दी जाती है उसकी सुगंध वायु के माध्यम से अनेक प्राणियों तक पहुंचती है। इस अवसर पर महायज्ञ के कार्यकर्ता वसंत राय,शिवजी राय ,विजयशंकर, फौजदार,दिनेश यादव। विगन,दुलचन कुशवाहा संतोष,उपेंद्र पांडेय आदि मौजूद रहे ।

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