



‘इम्पॉवर्ड वॉइसेस: वुमेन लीडिंग द चेंज’ विषय पर विद्वानों ने रखे विचार।।
जमानियां। स्थानीय स्टेशन बाजार स्थित हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ‘इम्पॉवर्ड वॉइसेस: वुमेन लीडिंग द चेंज’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
महिलाएं बदलाव की ध्वजवाहक – प्रो. अखिलेश शर्मा शास्त्री
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अखिलेश कुमार शर्मा शास्त्री ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज महिलाएं दुनिया को एक नई दिशा देने का कार्य कर रही हैं। वे केवल परिवर्तन का हिस्सा नहीं, बल्कि परिवर्तन की ध्वजवाहक बन चुकी हैं। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में उनका सशक्त नेतृत्व न केवल लैंगिक समानता को सशक्त बना रहा है, बल्कि एक समावेशी और प्रगतिशील समाज की नींव भी रख रहा है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण को केवल नारे तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे नीतियों और सामाजिक व्यवहार में भी स्पष्ट रूप से स्थान मिलना चाहिए। जब महिलाओं को समान अवसर और स्वतंत्रता मिलेगी, तो वे समाज को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सक्षम होंगी।
मुख्य अतिथि डॉ मदन गोपाल सिन्हा का संदेश
मुख्य अतिथि डॉ मदन गोपाल सिन्हा ने कहा कि दुनिया की आधी आबादी महिलाओं की है, लेकिन उन्हें अभी भी समान अवसर नहीं मिल रहे। उन्होंने महिलाओं के लिए समान रोजगार अवसरों पर जोर देते हुए कहा कि जब महिलाएं हर क्षेत्र में समान रूप से आगे बढ़ेंगी, तभी राष्ट्र का संपूर्ण विकास संभव होगा।
शिक्षा से होगा वास्तविक सशक्तिकरण – डॉ अभिषेक तिवारी
राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी एवं सहायक आचार्य हिंदी डॉ अभिषेक तिवारी ने संगोष्ठी का संचालन करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी कुंजी शिक्षा है। शिक्षा केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का भी मूल आधार है। जब महिलाएं शिक्षित होंगी, तो वे अपने अधिकारों को समझेंगी और समाज में मजबूती से अपने लिए स्थान बना सकेंगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे उनके जीवन के हर क्षेत्र में लागू किया जाना चाहिए। उन्हें निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिले, उनके विचारों को सम्मान मिले और उनके सपनों को पंख दिए जाएं, तभी असली बदलाव संभव होगा।
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ संजय सिंह का मत
डॉ संजय सिंह ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज की उन्नति से जुड़ा विषय है। उन्होंने शिक्षा, समान अवसर और सामाजिक समर्थन को महिला विकास का आधार बताया।
जब महिलाएं नेतृत्व करेंगी, तो दुनिया बदलेगी – डॉ ओमप्रकाश लाल श्रीवास्तव
डॉ ओमप्रकाश लाल श्रीवास्तव ने कहा कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो वे केवल अपने जीवन को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को बेहतर बनाती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अवसर देने का अर्थ है, समाज को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करना।
छात्र-छात्राओं की भागीदारी ने बढ़ाई संगोष्ठी की गरिमा
संगोष्ठी के दौरान महाविद्यालय के कई छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार साझा किए। इनमें मनीषा प्रियंका , ज्योति गुप्ता, खुशी गुप्ता, अंशिका सिंह, काजल, सोमनाशी शुक्ला समेत कई विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और महिला सशक्तिकरण के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।