गाजीपुर। पी.जी. कॉलेज गाजीपुर में शनिवार को एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें ड्रैगनफ्रूट से मूल्य वर्धित उत्पादों के निर्माण पर विस्तृत शोध प्रस्तुत किया गया। यह संगोष्ठी महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में सेमिनार हॉल में आयोजित हुई। इस अवसर पर कृषि विज्ञान संकाय के अंतर्गत कृषि अभियंत्रण विषय के शोधार्थी जितेंद्र कुमार ने “स्टडीज़ ऑन पोस्ट हार्वेस्ट प्रोफाइल एंड डेवलपमेंट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजीज ऑफ ड्रैगन फ्रूट्स” विषय पर अपने शोध प्रबंध का प्रस्तुतिकरण किया। उन्होंने बताया कि ड्रैगनफ्रूट शीघ्र खराब होने वाला फल है, परंतु इसमें पोषण एवं औषधीय गुणों की प्रचुरता पाई जाती है।
जितेंद्र कुमार ने कहा कि इन गुणों को वर्षभर सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ड्रैगनफ्रूट से जैम, जेली एवं आरटीएस (रेडी टू सर्व) जैसे मूल्य वर्धित उत्पादों का निर्माण किया गया। जैम व जेली में मिठास के लिए शहद का उपयोग किया गया, जबकि आरटीएस में स्टीविया नेचुरल स्वीटनर का प्रयोग हुआ। उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु सफेद मूसली की भी मिलावट की गई और उन्हें सामान्य तापमान व 5 डिग्री सेल्सियस पर 6 महीने तक संरक्षित किया गया।
परीक्षणों के दौरान पाया गया कि सभी उत्पादों के पोषण व औषधीय गुणों में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। सेंसरी परीक्षण में इन उत्पादों को स्वाद, रंग, सुगंध एवं टेक्सचर के आधार पर परीक्षण दल द्वारा अत्यधिक पसंद किया गया। शोध निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ कि ड्रैगनफ्रूट के शीघ्र खराब हो जाने की समस्या का समाधान मूल्य वर्धित उत्पादों के निर्माण से संभव है, जिससे उत्पादकों को लाभ मिलेगा और उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक विकल्प प्राप्त होंगे। प्रस्तुति के बाद उपस्थित प्राध्यापकों, शोधार्थियों व छात्रों द्वारा प्रश्न पूछे गए जिनका संतोषजनक उत्तर शोधार्थी ने दिया। तत्पश्चात विभागीय शोध समिति व अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ द्वारा शोध कार्य को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान की गई।
संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय, संयोजक प्रो. (डॉ.) जी. सिंह, प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार यादव, डॉ. रामदुलारे, डॉ. रविशेखर सिंह, शोध निर्देशक डॉ. कृष्ण कुमार पटेल, विभागाध्यक्ष इंजी. विपिन चंद्र झा सहित अनेक प्राध्यापक एवं शोध छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी का संचालन डॉ. जी. सिंह ने किया तथा अंत में आभार व्यक्त करते हुए इंजी. विपिन चंद्र झा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।