जमानियां। स्टेशन बाजार स्थित सब्जी मंडी में रविवार की सुबह ऐसा लग रहा था मानो सड़क ने अपने ट्रैफिक छोड़ मंडी बनने की कसम खा ली हो। जाम इतना जबर्दस्त था कि लोग सोचने लगे – सब्जी लेने जाएं या खुद पककर सब्जी बन जाएं!
जाम के चलते रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाला रास्ता पूरी तरह जाम हो गया। न वाहन हिले, न लोग, बस सब्जी वालों की गाड़ियों ने ऐसा कब्जा जमाया कि सड़क भी शरमा जाए। बेतरतीब खड़े वाहनों ने सड़कों को शतरंज की बिसात बना दिया – जहां जनता को बस प्यादा बनकर सरकना था, और वो भी अगर जगह मिल जाए तो! पैदल चलना ऐसा कठिन हो गया मानो रसोइए को बिना चाकू के सब्जी काटनी हो। कुछ लोग तो ट्रेन छूटने के बाद वहीं बैठ गए – बोले, “अब मंडी खुल ही गई है, आलू-प्याज ही खरीद लें!” स्थानीय लोगों की मानें तो समाधान आसान है – रास्ते को वन-वे कर दो और बड़े वाहनों को सुबह 6 से रात 8 बजे तक बैन कर दो। लेकिन अफसोस, ये बात प्रशासन तक पहुंचे उससे पहले सब्जियां पककर बिक जाती हैं और लोग जाम में ही गल जाते हैं। प्रशासन अभी भी नीबू के दाम और टमाटर की ताजगी में व्यस्त है, वरना इस सड़क-संकट का हल भी निकल सकता था। तब तक जनता को सलाह है – अगर स्टेशन की ओर जाना हो, तो सब्जी का थैला साथ रखें, क्या पता ट्रेन छूटे तो कम से कम खरीदारी ही हो जाए!