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तहसीलदार के कार्यों पर उठे सवाल, बार एसोसिएशन जमानियां ने किया न्यायिक बहिष्कार का ऐलान

ब्यूरो 20-06-2025

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जमानिया। तहसील जमानियां में पदस्थापित तहसीलदार रामनरायन वर्मा के खिलाफ एक बार फिर अधिवक्ता समुदाय में गहरा आक्रोश देखने को मिला है। बार एसोसिएशन की एक आपात बैठक आज अध्यक्ष श्री अशोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें तहसीलदार द्वारा न्यायिक प्रक्रिया की खुली अवहेलना और विधि-विरुद्ध कार्यों को लेकर तीखी निंदा की गई। तहसील प्रांगण में जम कर नारेबाजी की गई।

दरअसल, वाद संख्या – गीता देवी बनाम अंसार अहमद, ग्राम नरियाँव उर्फ उमरगंज में तहसीलदार न्यायालय में 18 जून 2025 को सुनवाई निर्धारित थी। उसी दिन आदेशात्मक रूप में प्रतिवादी को अंतिम अवसर देते हुए आपत्ति दाखिल करने को कहा गया था, अन्यथा आदेश सुरक्षित रखने की बात कही गई थी। किन्तु निर्धारित समय तक प्रतिवादी द्वारा आपत्ति दाखिल नहीं की गई। वादिनी पक्ष द्वारा न्यायालय में उपस्थिति दर्ज कराते हुए आदेश पारित करने की मांग की गई, जिस पर तहसीलदार द्वारा मौखिक रूप से सहमति जताई गई। इसके बावजूद, 19 जून 2025 को प्रतिवादी के अधिवक्ता द्वारा आपत्ति दाखिल करवाई गई, और आश्चर्यजनक रूप से तहसीलदार ने उस आपत्ति पर 18 जून की तिथि में ही इंडोर्समेंट कर दिया। जब बार एसोसिएशन के कुछ सदस्यों द्वारा इस गंभीर अनियमितता पर आपत्ति की गई, तो तहसीलदार ने अपना पूर्व इंडोर्समेंट बदलकर 19 जून कर दिया। यह कार्यवाही स्पष्ट रूप से न्यायिक मर्यादाओं और विधिसम्मत प्रक्रिया का उल्लंघन मानी जा रही है। बार एसोसिएशन जमानियां ने इसे न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य बताया है और मांग की है कि तहसीलदार रामनरायन वर्मा के विरुद्ध तत्काल विभागीय जांच कराते हुए उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए।

बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह भी घोषणा की गई कि तहसीलदार के स्थानांतरण तक अधिवक्ता समुदाय उनका न्यायिक बहिष्कार जारी रखेगा। यह बहिष्कार तहसीलदार न्यायालय एवं तहसीलदार न्यायिक दोनों पर लागू रहेगा। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि न्यायिक पदों पर आसीन अधिकारियों से निष्पक्षता और विधिक प्रक्रिया के पालन की उम्मीद किस सीमा तक सही साबित हो रही है। बैठक के बाद अधिवक्ताओं ने तहसील प्रांगण में जम कर नारेबाजी की। इस अवसर पर मेराज हसन‚ लखेश्वर सिंह‚ पंकज तिवारी‚ फैसल होदा‚ सुनील कुमार‚ मोहम्मद इमरान‚ काजी शकील‚ सच्चिदानंद‚ बृजेश ओझा‚ संजय यादव‚ घनश्याम सिंह‚ अक्षय कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।

नारेबाज़ी करते अधिवक्ता

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