गाजीपुर। जनपद में खरीफ सीजन 2025 के लिए कुल 1,94,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें अकेले धान की खेती लगभग 1,63,000 हेक्टेयर में की जा रही है, जो कुल खरीफ क्षेत्रफल का 85 प्रतिशत है। यह जनपद में सर्वाधिक बोई जाने वाली फसल है। धान की खेती जिले के सभी विकास खण्डों में की जाती है, परंतु जमानियां, भदौरा और रेवतीपुर जैसे क्षेत्रों में इसका विशेष रूप से अधिक उत्पादन होता है। इस सीजन में दलहन की खेती 8,000 हेक्टेयर, तिलहन 1,500 हेक्टेयर, और मिलेट्स (मोटे अनाज) 18,000 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है।
उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता
जनपद में निजी एवं सहकारिता क्षेत्र के माध्यम से किसानों को उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। अब तक निम्नलिखित उर्वरक भंडारित किए गए हैं:
यूरिया: 25,619 मैट्रिक टन
डीएपी: 8,282 मैट्रिक टन
एनपीके: 4,893 मैट्रिक टन
एसएसपी: 4,172 मैट्रिक टन
पोटाश: 1,046 मैट्रिक टन
अब तक सहकारी क्षेत्र के माध्यम से 1,564 मैट्रिक टन यूरिया एवं 946 मैट्रिक टन डीएपी का वितरण किया जा चुका है। इसके अलावा मैट्रिक्स कंपनी की 989 मैट्रिक टन डीएपी शीघ्र ही जनपद को प्राप्त होने वाली है, जिसका आवंटन जिलाधिकारी गाजीपुर द्वारा किया गया है। इसमें से 536 मैट्रिक टन डीएपी सहकारी क्षेत्र एवं 453 मैट्रिक टन डीएपी निजी क्षेत्र के माध्यम से वितरित की जाएगी। जनपद की 158 सहकारी समितियों के माध्यम से उर्वरकों का वितरण जारी है। जहां सचिवों की नियुक्ति नहीं है, वहां रोस्टर के अनुसार सचिवों की उपस्थिति सुनिश्चित कर वितरण किया जा रहा है।
किसानों से अपील
प्रशासन द्वारा किसानों से अपील की गई है कि वैज्ञानिक संस्तुतियों के अनुसार ही उर्वरकों का क्रय और प्रयोग करें। आवश्यकता से अधिक उर्वरकों का प्रयोग न केवल खेती की लागत बढ़ाता है, बल्कि मृदा, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। बेहतर और गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए किसानों को हरी खाद, कम्पोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे विकल्पों को अपनाने की सलाह दी गई है।