गाजीपुर। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में जनपद स्तरीय प्रशिक्षकों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी, और संबंधित कर्मचारी शामिल हुए।मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील पाण्डेय ने जानकारी दी कि जनपद में 10 अगस्त से सर्वजन दवा सेवन (MDA) अभियान की शुरुआत की जाएगी। इसके तहत सैदपुर, सदर, बिरनो, कासिमाबाद, मोहम्मदाबाद और भदौरा ब्लॉकों में आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर फाइलेरिया से बचाव की दवा अपने समक्ष खिलाएंगे। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी ब्लॉकों में माइक्रोप्लान समय से तैयार कर लिया जाए और अभियान की प्रतिदिन रिपोर्टिंग व डाटा फीडिंग ई-कवच पोर्टल पर सुनिश्चित की जाए। अभियान की नियमित समीक्षा भी की जाएगी।
नोडल अधिकारी डॉ. जे. एन. सिंह ने कहा कि सभी ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर्स का प्रशिक्षण समय से पूर्ण कराया जाए। उन्होंने बताया कि 11 जुलाई से चल रहे दस्तक अभियान के अंतर्गत आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर फाइलेरिया, वेक्टर जनित और संक्रामक रोगों से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान कर सूची जनपद मुख्यालय को उपलब्ध कराएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी को भी दवा हाथ में न दी जाए, बल्कि स्वास्थ्यकर्मी अपनी निगरानी में दवा खिलाएं ताकि कोई भी व्यक्ति दवा सेवन से वंचित न रह जाए। जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि फाइलेरिया एक मच्छरजनित रोग है, जिसके लक्षण 10 से 15 वर्षों बाद सामने आते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बचाव के लिए दवा का सेवन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देशित किया कि वे “क्या करें और क्या न करें” की जानकारी दें तथा “हर रविवार मच्छर पर वार” के बारे में लोगों को जागरूक करें।
कार्यशाला में पाथ संस्था के क्षेत्रीय समन्वयक अरुण कुमार, डब्ल्यूएचओ के मॉनिटर, और पीसीआई संस्था से राकेश कुमार ने भाग लिया और सभी ब्लॉकों से आए स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक (BPM), और ब्लॉक सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक (BCPM) को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया लाइलाज बीमारी है, इसका केवल प्रबंधन और देखरेख ही संभव है। गंभीर अवस्था में ‘एमएमडीपी किट’ दी जाती है, जिससे प्रभावित अंगों की नियमित सफाई की जा सके। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी को खिलाई जाएगी।1 से 2 वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाजोल की आधी गोली दी जाएगी। खाली पेट किसी को भी दवा नहीं दी जाएगी।कार्यशाला में लगभग 50 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया, जो अब ब्लॉक स्तर पर ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर को प्रशिक्षित करेंगे।