गाजीपुर। अति प्राचीन श्री रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से लीला के आठवें दिन बुधवार 24 सितंबर 2025 की शाम 7 बजे सकलेनाबाद स्थित श्रीराम चबूतरा पर भरत मनावन एवं विदाई लीला का भव्य मंचन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी, उपमंत्री लव कुमार त्रिवेदी, प्रबंधक मनोज कुमार तिवारी, उपप्रबंधक मयंक तिवारी व कोषाध्यक्ष रोहित अग्रवाल द्वारा प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और सीता को माला पहनाकर आरती पूजन से हुई। इसके बाद आदर्श रामलीला मंडल के कलाकारों ने लीला का मंचन किया। लीला के क्रम में दर्शाया गया कि महाराज दशरथ श्रीराम के वनगमन के वियोग में देह त्याग देते हैं। कुलगुरु वशिष्ठ की प्रेरणा से महामंत्री सुमंत भरत और शत्रुघ्न को कैकेय देश से अयोध्या बुलाते हैं। स्वप्न में अशुभ संकेत देखने के बाद भरत अयोध्या लौटते हैं और वहां पिता महाराज दशरथ के निधन तथा माता कैकई द्वारा श्रीराम को वनवास देने की बात जानकर विचलित हो उठते हैं। भरत ने दरबार में घोषणा की कि अयोध्या के राजा केवल श्रीराम होंगे और वे स्वयं श्रीराम को मनाने वन प्रदेश चल पड़ते हैं।
लीला में आगे दर्शाया गया कि मार्ग में निषादराज गुह से मिलन और फिर भारद्वाज आश्रम में श्रीराम-भरत मिलन का भावुक दृश्य हुआ। भरत ने श्रीराम से आग्रह किया कि वे वापस अयोध्या लौटें, परंतु श्रीराम ने वनवास धर्म का पालन करते हुए मना कर दिया। अंततः भरत ने प्रभु के चरण पादुका को अयोध्या का राजचिन्ह मानकर अपने सिर पर धारण किया। इस भावपूर्ण दृश्य से पूरा मेला स्थल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। लीला के समापन पर भरत-शत्रुघ्न का रथ हरिशंकरी श्रीराम सिंहासन से उठकर मुरली कटरा, पावर हाउस रोड, परसपुरा, झुन्नू लाल चौराहा, आमघाट, ददरी घाट चौक, महुआ बाग होते हुए बाजे-गाजे के साथ सकलेनाबाद स्थित श्रीराम सिंहासन पर पहुंचा।इस अवसर पर कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी, उपमंत्री लव कुमार त्रिवेदी, उपप्रबंधक मयंक तिवारी, ओमप्रकाश पांडेय समेत समिति के अन्य पदाधिकारी व भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।