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नैनो उर्वरक जागरूकता अभियान के तहत कृषि अधिकारियों व किसानों का प्रशिक्षण

ब्यूरो 23-12-2025

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गाजीपुर| नैनो उर्वरक जागरूकता अभियान के अंतर्गत कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम विकासखंड सदर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र, पीजी कॉलेज गाजीपुर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला कृषि अधिकारी गाजीपुर उमेश कुमार उपस्थित रहे। कार्यक्रम में केवीके पीजी कॉलेज के कार्यक्रम समन्वयक विनोद कुमार सिंह, इफको के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक (गोरखपुर) विनोद कुमार सिंह, अपर जिला कृषि अधिकारी, प्रो. सिंह (विभागाध्यक्ष, शस्य विज्ञान विभाग, पीजी कॉलेज), कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, किसान यूनियन के प्रगतिशील किसान सहित कुल 130 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

इस अवसर पर इफको के वरिष्ठ क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा किसानों को फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी दी गई तथा नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्लस के प्रयोग की विधि एवं लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। बताया गया कि नैनो डीएपी का प्रयोग 5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज शोधन तथा 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से जड़ शोधन कर आधा घंटा सुखाने के बाद बुवाई/रोपाई करनी चाहिए। फसल में पत्तियां आने पर नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी को एक साथ 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई। दूसरी टॉप ड्रेसिंग में दानेदार यूरिया के स्थान पर नैनो यूरिया के प्रयोग तथा धान में जिंक की कमी होने पर नैनो जिंक (1–2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) के छिड़काव की जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने फास्फेटिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करते हुए नैनो यूरिया, नैनो डीएपी एवं सागरिका के अधिकाधिक प्रयोग की अपील की। वहीं केवीके पीजी कॉलेज के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने कैंपस में किए गए नैनो उर्वरकों के प्रदर्शन प्रयोग एवं उनके लाभों की जानकारी किसानों को दी।

इफको के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक वी.के. सिंह ने बताया कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से किसानों की लागत में कमी आएगी तथा यूरिया एवं डीएपी के अत्यधिक प्रयोग से जल, मृदा एवं पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी बचाव होगा। उन्होंने रबी सीजन में गेहूं, सरसों, आलू, चना एवं मटर की फसलों में नैनो डीएपी से बीज शोधन कर बुवाई करने तथा दानेदार डीएपी की मात्रा आधी करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि 500 मिलीलीटर नैनो डीएपी से 100 किलोग्राम बीज का शोधन किया जा सकता है, जिसकी लागत मात्र 600 रुपये है, जो दानेदार डीएपी की तुलना में काफी सस्ती है। इससे उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों में वृद्धि होती है। कार्यक्रम में कृषि विभाग के फार्म मैनेजर अखलेंद्र सिंह (जमानियां) एवं प्रगतिशील किसान अनूप राय ने नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्लस के प्रयोग से गेहूं एवं धान की फसलों में हुए सकारात्मक परिणामों का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से लागत में कमी के साथ उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि हुई। साथ ही किसानों को ड्रोन के माध्यम से स्प्रे तकनीक अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया।

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