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सकुशल संपन्न हुआ वाराणसी ए के तत्वाधान में आयोजित “एक भारत श्रेष्ठ भारत कैंप”

ब्यूरो 06-11-2024

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय वाराणसी।  वाराणसी ग्रुप ए (91 यूपी बटालियन) के तत्वाधान में स्वामी हरसेवानंद पब्लिक स्कूल के कैंपस में 12 दिवसीय “एक भारत श्रेष्ठ भारत कैंप” सकुशल संपन्न हुआ। उक्त कैंप में तमिलनाडु डायरेक्टरेट के विभिन्न ग्रुप तथा यूपी डायरेक्टरेट के वाराणसी ए, वाराणसी बी,लखनऊ तथा प्रयागराज ग्रुप ने हिस्सा लिया और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया। EBSB कैंप का मुख्य उद्देश्य भारत जैसे विविधता पूर्ण देश की विविधताओं का आपस में जुड़ाव दिखाना है जो कि इस कैंप ने बेहद शानदार तरीके से दिखाया। यह कैंप केवल एक सामान्य कैंप ना होकर एनसीसी कैडेट्स के लिए देश के हर कोने की खूबियां ,राज्यों से आपसी तालमेल बढ़ाने व उनकी संस्कृति को जानने का एक साधन है और 91 UP बटालियन, वाराणसी ने अपने तत्वाधान में इस कैंप का आयोजन कराकर इस उद्देश्य की जड़ों को प्रबल बनाया है।

भारत विश्वगुरु है, हम “सर्वे भवंतु सुखिन, सर्वे संतु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यंतु, मां कश्चित दुखभाग भवे”, वसुदेव कुटुंबकम जैसे सिद्धांतों को मानने में विश्वास रखते हैं। यहां विभिन्न संस्कृति, धर्म, भाषा, और परंपराएँ एक साथ मिलती हैं। भारत का प्रत्येक राज्य अपनी अनूठी संस्कृति, त्योहार, संगीत, और भोजन के लिए जाना जाता है। धार्मिक विविधता भी भारत की पहचान है, जहाँ हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, और बौद्ध धर्म जैसे विभिन्न धर्मों के अनुयायी रहते हैं। यही विविधता भारतीय समाज को समृद्ध बनाती है और एक दूसरे के प्रति सहिष्णुता और समझ को बढ़ावा देती है। भारत की संपूर्ण आबादी का 65% हिस्सा युवा है और कहा जाता रहा है कि ” संघर्षों के साए में इतिहास हमारा पलता है, जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है”। और एनसीसी प्रशिक्षण युवाओं के नेतृत्व विकास में महत्वपूर्ण योगदान करता है। उक्त EBSB कैंप 26 October 2024 से लेकर 6 November तक चला और इन 11 दिनों में कैडेट्स ने विभिन्न तरीकों से ज्ञानार्जन किया।

हमारी शुरुआत ब्रिगेडियर कुलबीर सिंह के प्रेरणादायक उद्घाटन भाषण के साथ हुई, जिसने आगामी दिनों की दिशा तय की। हमने कई महत्वपूर्ण विषयों का अन्वेषण किया, जैसे कि कचरा प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया, सशस्त्र बलों के लिए करियर मार्गदर्शन, और एसएसबी इंटरव्यू की तैयारी। एआरओ वाराणसी की प्रेरणादायक वार्ता ने हमें ऊंचे लक्ष्य रखने के लिए प्रेरित किया, और सहायक भर्ती कार्यालय और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की टीम के सत्रों ने संकट प्रबंधन के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान किया। हमने वार्ता सत्रों में एनसीसी कैडेट्स की जिम्मेदारियों, भारतीय कला और पर्यटन की समृद्धि, और राष्ट्रीय एकीकरण के महत्व जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया। इन चर्चाओं ने हमारे देश को जोड़ने वाले मूल्यों की समझ को और मजबूत किया। इसके अतिरिक्त हमने एक्सचेंज पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (EXPA) के माध्यम से विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया, जो भारतीय युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करती है। इन प्रशिक्षणों में ‘आईस ब्रेकर्स’ अभ्यास और संचार तकनीक, आत्म-समझ, सुनने की कुशलता, टीम निर्माण, आत्म-विश्वास निर्माण, रचनात्मक सोच और सार्वजनिक भाषण तकनीकों पर कार्यशालाएँ शामिल थीं।

हमारी वार्ता और बहस प्रतियोगिताओं के साथ-साथ खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं, जैसे वॉलीबॉल, क्रॉस-कंट्री और रस्साकशी। इस शिविर में इंटरएक्टिव गतिविधियाँ भी थीं—हमने बहस, क्विज़ और “अपना घर” में सामाजिक सेवा पहल में भाग लिया, जिससे सामुदायिक सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का बोध जागृत हुआ। एनआईएपी सत्र में, जो पूरी तरह से सांस्कृतिक था, हमने भारत की विविध परंपराओं, भाषाओं और रीतियों को मनाया। दीपावली की शाम में हिन्दी का आलोक। निःसंदेह त्यौहार का असली मतलब तभी साध्य है जब परिवार साथ हो लेकिन इस कैंप ने इस स्थिर सत्य को भी मात दे दी, जहां हर बार हम केवल परिवार जनो तक सीमित रहकर त्यौहार मनाते है वहीं इस कैंप की बदौलत हमने यह दिवाली लगभग 600 700 लोगों के साथ पूरे फौजी ढंग से मनाई। और  वाकई यह पूरे कैंप का सबसे मार्मिक संदर्भ रहा। और अंतत वह समय भी आ गया जिसका सबको बेसब्री से इंतजार था ऑल ओवर चैंपियनशिप ट्रॉफी का खिताब ग्रुप कमांडर ब्रिगेडियर कुलबीर सिंह के द्वारा *वाराणसी ए* को मिला, अपनी मेहनत का फल पाकर वाराणसी ग्रुप ए के सारे कैडेट्स के चेहरे खिल उठे ,खुशी उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी। यह ट्रॉफी केवल एक धातु निर्मित प्रतीक न होकर जिंदा एहसास था।

शिविर केवल सीखने सीखने तक सीमित नहीं था, बल्कि यहां बनाए गए संबंधों को भी समर्पित था। जैसे हम समापन की ओर बढ़ रहे हैं, तो आइए, “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के सबक, दोस्ती और एकता को अपने साथ लेकर जाएं। मीठी यादों के साथ शिविर समाप्त हुआ।

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