गाजीपुर। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के निर्देशानुसार महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013 के अनुसार जनपद के सभी सार्वजनिक एवं निजी संस्थानों जिसमें 10 या 10 से अधिक कार्मिक कार्यरत है में आन्तरिक परिवाद समिति का गठन किया जाना है।
यह कार्य अधिनियम की धारा 26 को ध्यान में रखते हुए पूर्ण कराया जा सकता है, जिसमें ऐसे सभी नियोक्ताओं के विरूद्ध शास्ति (50,000 रू0 तक का जुर्माना) अधीरोपित करने की व्यवस्था है, जिन्होने अधिनियम की धारा 4(1) के अनुक्रम में आन्तरिक समिति का गठन नही किया है। उल्लेखनीय है कि ऑरेलियानो फर्नांडीस बनाम- गोवा राज्य की अपील में प्रदेश के सभी कार्यस्थलों पर अधिनियम के प्राविधानों के अनुरूप आन्तरिक परिवाद समिति का गठन किया जाना आवश्यक है।लैंगिक उत्पीड़न के शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु जिलाधिकारी द्वारा तहसील क्षेत्रों के लिए उपजिलाधिकारी, ग्रामीण क्षेत्र के लिए खण्ड विकास अधिकारी एवं शहरी क्षेत्र के लिए अधिशासी अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किया है।
आंतरिक परिवार समिति का गठन कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न की शिकायतों का समाधान करने के लिए एक विशेष अधिकारिक तंत्र का निर्माण करता है, ताकि महिलाएँ सुरक्षित महसूस कर सकें और उनके अधिकारों का उल्लंघन न हो। यह समिति उत्पीड़न की स्थिति में जांच करने और कार्यवाही करने के लिए जिम्मेदार होती है, जिससे महिलाओं को सम्मानजनक और सुरक्षित कार्यस्थल मिल सके।