गाजीपुर। देवकली ब्लॉक मुख्यालय से 8 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम, देवकली-शादियाबाद मार्ग पर स्थित धुवार्जुन गांव में बाबा चौमुखनाथ धाम पर महाशिवरात्रि के अवसर पर दो दिवसीय मेले का आयोजन 26-27 फरवरी को किया जा रहा है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग के चारों दिशाओं में मुख होने के कारण इसे बाबा चौमुखनाथ धाम कहा जाता है। इस मंदिर के चारों ओर विशाल द्वार बनाए गए हैं। मंदिर के समीप एक तालाब है, जिससे खरारी नदी निकलती है, जो वर्षा के दिनों में विकराल रूप धारण कर लेती है।
मंदिर की ऐतिहासिक मान्यता
प्राचीन काल में इस स्थान पर घना जंगल था, जिसमें कबीरपंथी मठ स्थित था, जो आज भी मौजूद है। बताया जाता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व यहां एक साधु रहते थे, जो गाय पालन में रुचि रखते थे। उनकी एक गाय प्रतिदिन दूध देती थी, लेकिन अचानक उसने दूध देना बंद कर दिया। साधु ने इस रहस्य को जानने के लिए गाय का पीछा किया तो पाया कि गाय एक टीले पर खड़ी हो गई और उसके थनों से दूध की धारा स्वतः बहने लगी। यह क्रम कई दिनों तक चलता रहा।साधु ने जब समीप जाकर देखा तो वहां चार मुख वाला शिवलिंग प्रकट हुआ। ग्रामीणों के सहयोग से खुदाई शुरू की गई, लेकिन शिवलिंग की लंबाई का पता नहीं चल सका। लगातार खुदाई के दौरान भूमि से जल धारा फूट पड़ी, जिससे खुदाई रोककर उसी स्थान पर मंदिर निर्माण का निर्णय लिया गया।
विशेष आकर्षण
बाबा चौमुखनाथ धाम की देखरेख करने वाली समिति के अध्यक्ष वेचन राय तथा पुजारी वीरेंद्र गिरि, पंकज राय, विनोद राय, सुधीर पांडेय, अवधेश चौहान, आशीष राय, बबलू राजभर और मुकेश राम ने बताया कि मंदिर के चारों ओर विशाल द्वार बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, एक किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग पर 50 फीट ऊंचा प्रवेश द्वार निर्मित किया गया है, जिस पर शिव परिवार सहित पांच देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर इस धाम में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु आकर भगवान शिव के