गाजीपुर। एक ओर जहां देशभर में होली और जुमे की नमाज के एक साथ पड़ने को लेकर चर्चाएं हो रही थीं, वहीं गाजीपुर के नोनहरा ग्रामसभा में मुस्लिम समुदाय ने सद्भावना और भाईचारे की मिसाल पेश की। शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने पारंपरिक रूप से होली जुलूस निकालकर गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा को कायम रखा। यह पहली बार नहीं हुआ, बल्कि यह जुलूस पिछले तीन दशकों से लगातार निकाला जा रहा है।
थानाध्यक्ष ने किया जुलूस का स्वागत
हर साल की तरह इस बार भी ग्राम प्रधान अयातुल्लाह राइनी और श्रीकांत उपाध्याय घोड़े पर सवार होकर चौक बाजार से जुलूस की अगुवाई की। हाथी, घोड़े, ऊंट और गाने-बाजे के साथ निकली इस भव्य बारात में सैकड़ों की संख्या में दोनों समुदायों के लोग शामिल हुए। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर बारात का भव्य स्वागत किया गया, जिसमें हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ शामिल थे। जुलूस जब नोनहरा थाना पहुंचा, तो थानाध्यक्ष दीपक कुमार के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों ने बारात का स्वागत किया।
तीन दशकों से कायम है परंपरा
ग्राम प्रधान अयातुल्लाह राइनी ने बताया कि यह परंपरा करीब 30 वर्षों से चली आ रही है, जिसमें मुस्लिम समुदाय की अगुवाई में होली जुलूस निकाला जाता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है, जिसे आगे भी इसी उत्साह के साथ जारी रखा जाएगा।
जुलूस में उमड़ा जनसैलाब
इस ऐतिहासिक जुलूस में प्रमुख रूप से बदरुल इस्लाम, लक्ष्मण, मुन्ना कमलापुरी, मदमोद कमलापुरी, जितेंद्र कुशवाहा, शुबरती राइनी, शाफुल्ला खान, अबरार अहमद, मुख्तार राइनी, नेहाल जावेद, लुकमान अली, गुफरान, शमीम, राकेश गुप्ता, बेचू गुप्ता, बीरा, राम विलास, सुरेंद्र यादव, रामचीज यादव, सोनू, पन्नू, लाल बाबू, शमशाद, इरशाद मास्टर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।यह आयोजन सामाजिक समरसता और सांप्रदायिक सौहार्द का एक अनूठा उदाहरण है, जिसने गाजीपुर में भाईचारे की मिसाल पेश की है।