जमानियां (गाजीपुर)। कोतवाली क्षेत्र के टिसौरा गांव निवासी अनुसूचित जाति की विधवा महिला बिंदु देवी ने गांव के कुछ लोगों द्वारा की गई जातीय उत्पीड़न की घटना को लेकर विशेष अपर सत्र न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट, गाजीपुर की अदालत में एक प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि गांव के भूमिहार जाति के कुछ लोगों ने उनके साथ जातिसूचक गालियां दीं, मारपीट की, शारीरिक अभद्रता की और जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता के अनुसार, उन्होंने 9 जनवरी 2025 को अंजनी गुप्ता से रजिस्टर्ड बैनामा के जरिए जमीन खरीदी थी। 8 मई 2025 को जब वह उस जमीन पर मिट्टी गिरवा रही थीं, तभी गांव के प्रियांशु राय, रिषभ राय, सच्चिदानन्द राय, रविन्द्र राय, नमोनरायन राय, श्यामनरायन राय, मुकेश राय, सुरेश राय, कमलेश राय और अन्य लोग हथियारों से लैस होकर पहुंचे और उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए मारपीट करने लगे।
बिंदु देवी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जमीन पर पटककर निर्वस्त्र करने की कोशिश की गई और उनके पुत्र विश्वकर्मा को लोहे की रॉड से मारा गया जिससे वह घायल हो गया। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई, लेकिन थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। पीड़िता का दावा है कि मौके पर पहुंचे सीओ जमानियां भी अभियुक्तों से मिलकर लौट गए। बिंदु देवी ने बताया कि 10 मई को उनके बेटे की मेडिकल जांच गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में कराई गई, परंतु सीटी स्कैन और एक्स-रे की रिपोर्ट पुलिस ने अपने पास रख ली और अब तक किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। 13 मई को पीड़िता ने अपने बेटे के साथ गाजीपुर पहुंचकर एसपी को शिकायत पत्र सौंपा और जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई।
अब अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच का आदेश दिया जाए। बिंदु देवी का आरोप है कि पुलिस आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है और पीड़ित परिवार को अब तक कोई सुरक्षा भी नहीं दी गई है। इस पूरे मामले में प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर प्रियांशु राय, रिषभ राय, सच्चिदानन्द राय, रविन्द्र राय, नमोनरायन राय, श्यामनरायन राय, मुकेश राय, सुरेश राय, कमलेश राय और रूपेश राय के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। यह मामला न केवल जातीय भेदभाव और महिला उत्पीड़न का गंभीर उदाहरण है, बल्कि न्याय व्यवस्था में निष्पक्षता और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता की ओर भी संकेत करता है।