गाजीपुर। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के भूमिहीन एवं आर्थिक रूप से कमजोर पशुपालकों की आय बढ़ाने तथा कुपोषण की समस्या से निपटने के उद्देश्य से बकरी पालन योजना संचालित की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। उन्होंने बताया कि बकरी पालन एक कम लागत और कम जोखिम वाला व्यवसाय है, जिससे दूध एवं मांस के रूप में आय और पोषण दोनों प्राप्त होते हैं। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में बकरी उत्पादों का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे कुल आय में वृद्धि होगी तथा गरीब परिवारों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
योजना का स्वरूप
योजना के अंतर्गत जनपद में कुल 14 बकरी इकाइयों की स्थापना की जाएगी। प्रत्येक इकाई में
01 नर एवं 05 मादा बकरी उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रति इकाई कुल लागत ₹60,000 निर्धारित है।
राज्यांश (90%) : ₹54,000
लाभार्थी अंश (10%) : ₹6,000
इस राशि में बकरियों की खरीद, बीमा, चिकित्सा एवं परिवहन की व्यवस्था शामिल है। एक मादा बकरी का मूल्य ₹9,000 निर्धारित किया गया है।
पात्रता
आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक हो।
अनुसूचित जाति का भूमिहीन या गरीब पशुपालक हो।
बकरियों के पालन हेतु उचित स्थान उपलब्ध हो।
विधवा एवं निराश्रित महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
चयन प्रक्रिया में 3% स्थान दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित रहेगा।
आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज
आधार कार्ड
जाति प्रमाण पत्र (ग्राम प्रधान द्वारा जारी प्रमाण पत्र भी मान्य)
बैंक पासबुक की छायाप्रति (₹6,000 लाभार्थी अंश खाते में होना आवश्यक)
बकरी पालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (यदि उपलब्ध हो)
विधवा/दिव्यांग होने का प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
इच्छुक लाभार्थी अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय अथवा विकास भवन स्थित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
अंतिम तिथि
योजना के अंतर्गत आवेदन की अंतिम तिथि 30 मई 2026 निर्धारित की गई है।