गाजीपुर। जनपद के सिद्धपीठ मठ भूड़कुड़ा से संचालित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान श्री महंत रामाश्रय दास पीजी कॉलेज में तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की हालिया नियुक्तियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। महाविद्यालय की साधारण समिति के सदस्यों ने नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत
शिकायतकर्ताओं ने इस मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ, उच्च शिक्षा मंत्री तथा शिक्षा निदेशालय वाराणसी व प्रयागराज को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
क्या हैं मुख्य आरोप?
साधारण समिति के सदस्य—ओम प्रकाश सिंह, अरविंद सिंह, डॉ. मुकेश कुमार सिंह और ज्ञान प्रकाश वर्मा—ने संयुक्त रूप से लगाए गए आरोपों में कहा कि: गोपनीय तरीके से नियुक्ति: चार तृतीय श्रेणी पदों पर बिना समिति की बैठक या सहमति के नियुक्तियां कर दी गईं। मानदेय कर्मियों की अनदेखी: वर्षों से कार्यरत लगभग 18 मानदेय कर्मचारियों को पदोन्नति का अवसर नहीं दिया गया। आरक्षण नियमों की अनदेखी: नियुक्ति प्रक्रिया में आरक्षण के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। सदस्यों का कहना है कि जब प्रबंध समिति पहले से ही विवादों में है, तो ऐसी नियुक्तियां और भी संदिग्ध प्रतीत होती हैं।
प्राचार्य का पक्ष
इस मामले में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बृजेश जायसवाल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि—“नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत और अध्यक्ष के निर्देशानुसार की गई हैं।”
निष्कर्ष
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक स्तर पर पहुंच चुका है। अब देखना होगा कि जांच होती है या नहीं और यदि होती है तो नियुक्तियों में पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों का क्या निष्कर्ष निकलता है|