गाजीपुर। कृषि विभाग द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, पी.जी. कॉलेज परिसर में आयोजित दो दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला में किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, कृषि विशेषज्ञों, कृषि सखियों तथा कृषक उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश राय ने कहा कि प्राकृतिक खेती कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा और कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग रही है। उन्होंने कहा कि समय के साथ यह पद्धति पीछे छूट गई, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इसे पुनः अपनाने की आवश्यकता है। यदि हमें स्वस्थ एवं निरोगी जीवन चाहिए तो प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ दशक पूर्व किसानों को उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग हेतु प्रोत्साहित किया जाता था, जबकि आज स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं नगर पालिका परिषद गाजीपुर की अध्यक्ष श्रीमती सरिता अग्रवाल ने कहा कि किसानों के मन में यह धारणा रहती है कि प्राकृतिक खेती अपनाने से उत्पादन कम हो जाएगा, जबकि लगातार तीन से चार वर्षों तक प्राकृतिक खेती करने से भूमि की उर्वरता में वृद्धि होती है और उत्पादन क्षमता भी संतुलित स्तर पर बनी रहती है। साथ ही खेती की लागत में कमी आने से किसानों की आय में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों, कृषि सखियों एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के सदस्यों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत विकास भवन एवं विभिन्न विकास खंडों में संचालित प्रेरणा कैंटीनों से जुड़कर प्राकृतिक खेती एवं श्रीअन्न (मिलेट्स) से निर्मित उत्पादों का विपणन करें। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग को मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत मिलेट्स आउटलेट स्थापित करने हेतु 10 लाख रुपये तक अनुदान का लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसके लिए इच्छुक व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं।कार्यशाला के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र, पी.जी. कॉलेज के वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटकों—जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र एवं अग्नास्त्र—के निर्माण एवं उपयोग की प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन कर किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं प्रतिभागियों ने श्रीअन्न से निर्मित विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया और उनकी सराहना की। इस अवसर पर श्रीमती अंजू चतुर्वेदी, अध्यक्ष, लहुरी काशी वूमेन फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी द्वारा रागी से निर्मित विशेष केक प्रस्तुत किया गया, जिसकी सभी अतिथियों ने प्रशंसा की। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों तथा किसान उत्पादक संगठनों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर प्राकृतिक कृषि उत्पादों, श्रीअन्न आधारित खाद्य पदार्थों एवं कृषि नवाचारों का प्रदर्शन भी किया गया, जो प्रतिभागियों के आकर्षण का केंद्र रहा।