गाजीपुर। जनपद में आईएस-191 (मुख्तार अंसारी गिरोह) से जुड़े सदस्यों, सहयोगियों तथा तत्कालीन शस्त्र लिपिकों एवं अधिकारियों के विरुद्ध शस्त्र लाइसेंसों के दुरुपयोग की जांच में महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई है। पुलिस ने गैंग से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों के सत्यापन के दौरान सामने आई अनियमितताओं के आधार पर अफजाल अंसारी एवं तत्कालीन शस्त्र लिपिक प्रेमाशंकर वर्मा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है।पुलिस के अनुसार पुलिस उपमहानिरीक्षक, वाराणसी परिक्षेत्र के निर्देश पर माफिया मुख्तार अंसारी (दिवंगत) एवं उसके परिजनों के साथ ही आईएस-191 गैंग के सदस्यों और सहयोगियों को जारी कुल 51 शस्त्र लाइसेंसों पर खरीदे-बेचे गए 145 शस्त्रों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। इसके लिए अपर पुलिस अधीक्षक नगर एवं ग्रामीण के नेतृत्व में क्षेत्राधिकारियों और थाना प्रभारियों की अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं।
जांच के दौरान कई शस्त्रों की वर्तमान स्थिति का पता नहीं चल सका। साथ ही शस्त्रों के क्रय-विक्रय में अनियमितता तथा जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से संबंधित मूल अभिलेख और पत्रावलियां गायब होने के तथ्य भी सामने आए। पुलिस का आरोप है कि शस्त्र लाइसेंस से संबंधित दस्तावेज तत्कालीन शस्त्र लिपिक के साथ कथित मिलीभगत कर गायब कराए गए, जिससे शस्त्रों का सत्यापन प्रभावित हुआ। पुलिस के अनुसार अफजाल अंसारी के नाम जारी शस्त्र लाइसेंस संख्या 1241/पी-11 से संबंधित मूल पत्रावली और क्रय-विक्रय अभिलेख उपलब्ध नहीं मिले। जांच में यह भी सामने आया कि इस लाइसेंस पर वर्षों पहले अरुणाचल प्रदेश के आलोंग जिले से एक एनपीबी राइफल और एक .32 बोर रिवॉल्वर का क्रय-विक्रय हुआ था, लेकिन दोनों शस्त्रों की वर्तमान स्थिति का सत्यापन नहीं हो सका। इस मामले में मोहम्मदाबाद थाने पर अफजाल अंसारी और तत्कालीन शस्त्र लिपिक प्रेमाशंकर वर्मा के विरुद्ध संबंधित धाराओं तथा आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने बताया कि अन्य शस्त्र लाइसेंसों और शस्त्रों का सत्यापन अभी जारी है तथा जांच में अनियमितता मिलने पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।