गाजीपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के बी.एड. प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा गाजीपुर स्थित स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सोमवार से शुरू हुई। परीक्षा के दूसरे दिन, बुधवार को आयोजित द्वितीय प्रश्न पत्र की परीक्षा में 13 परीक्षार्थी नकल करते हुए पकड़े गए, जिन्हें तत्काल रिस्टीकेट कर दिया गया।
परीक्षा केंद्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था:
स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर को इस परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया है, जहां 20 बी.एड. महाविद्यालयों के छात्र परीक्षा दे रहे हैं। बुधवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित परीक्षा में कुल 1578 पंजीकृत परीक्षार्थियों में से 1537 उपस्थित हुए, जबकि 41 अनुपस्थित रहे। परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए महाविद्यालय प्रशासन ने सख्त कदम उठाए। प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने बताया कि विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग से निरंतर संपर्क रखा जा रहा है और परीक्षा के दौरान सभी आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
नकल रोकने के लिए कड़े कदम:
परीक्षा केंद्र पर प्रवेश से पहले सीओ सिटी सुधाकर पाण्डेय की मौजूदगी में पुलिस बल और पीएसी द्वारा सघन तलाशी ली गई। परीक्षार्थियों को मोबाइल, स्मार्टवॉच, पर्स, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और नकल सामग्री लाने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद परीक्षा कक्ष की जांच के दौरान 13 परीक्षार्थी नकल करते हुए पकड़े गए। विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों के तहत उनके खिलाफ तत्काल रिस्टीकेशन की कार्रवाई की गई।
बिहार के परीक्षार्थी अधिक संख्या में शामिल:
प्राचार्य प्रोफेसर पाण्डेय ने बताया कि पकड़े गए नकलचियों में अधिकतर बिहार के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बिहार में बी.एड. डिग्री के आधार पर बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इसके अलावा, आगामी शिक्षक भर्ती की संभावनाओं को देखते हुए बिहार के कई छात्रों ने उत्तर प्रदेश के स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में बी.एड. में दाखिला लिया है और नकल के माध्यम से डिग्री प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।
परीक्षार्थियों से ईमानदारी की अपील:
प्राचार्य ने सभी परीक्षार्थियों से अपील की कि वे परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग न करें और अपने ज्ञान के आधार पर परीक्षा दें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा में अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
जांच दल की सक्रिय भूमिका:
परीक्षा में सख्ती सुनिश्चित करने के लिए गठित जांच दल में प्रमुख रूप से मुख्य कुलानुशासक प्रोफेसर (डॉ.) एस. डी. सिंह परिहार, प्रोफेसर (डॉ.) एस. एन. सिंह, प्रोफेसर (डॉ.) अरुण कुमार यादव, डॉ. रामदुलारे, डॉ. योगेश, डॉ. गोपाल यादव, डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव और डॉ. प्रतिमा सिंह शामिल थे।
परीक्षा के दौरान नकल को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा सख्त निगरानी रखी जा रही है। विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।