गाजीपुर। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। गाजीपुर जिले के बिरनो थाना क्षेत्र में खुलेआम असलहा लहराने और फायरिंग करने का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस मामले में पीड़ित ने डीएम, एसपी, डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह समेत मुख्यमंत्री से शिकायत कर आरोपियों के असलहों का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
बिरनो थाना क्षेत्र के चक कपिल गांव निवासी रामाकांत पांडेय ने प्रशासन को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि उन्होंने अपने गांव के गाटा संख्या 627 की पक्की पैमाइश के लिए उपजिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया था। इसके बाद 29 दिसंबर 2023 को क्षेत्रीय लेखपाल और कानूनगो को नापी करने का आदेश दिया गया था, जिसके तहत फील्ड बुक भी तैयार किया गया। लेकिन आरोप है कि विपक्षी पक्ष दबंग और प्रभावशाली होने के कारण अधिकारियों पर दबाव बना रहा था, जिससे पैमाइश की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। 20 फरवरी को तय हुआ था कि लेखपाल, कानूनगो और पुलिस की मौजूदगी में पत्थर गाड़कर नापी की जाएगी, लेकिन विपक्षियों के दबाव में पुलिस बिना नापी कराए ही वापस लौट गई।
इसके बाद रात में जबरन मनमाने ढंग से नापी करने का प्रयास किया गया, जिसका विरोध करने पर विवाद हो गया। इस दौरान आरोपियों ने खुलेआम पिस्टल, बंदूक और कट्टे से फायरिंग की और गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी दी। किसी तरह भागकर पीड़ित ने अपनी जान बचाई और तत्काल डायल 112 और बिरनो थाने में इसकी शिकायत की।
एसओ पर तहरीर बदलवाने का आरोप
पीड़ित का आरोप है कि जब वह शिकायत लेकर थाना पहुंचे तो थानाध्यक्ष (एसओ) ने घर आकर दबाव बनाया और तहरीर बदलवाने का प्रयास किया। जब पीड़ित ने मना किया तो पुलिस जबरदस्ती उन्हें थाने ले गई और दबाव बनाकर फायरिंग से जुड़ी धाराएं हटवा दीं। इसके बाद मामूली धाराओं में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई।
वीडियो के आधार पर की गई शिकायत
पीड़ित ने असलहा लहराने और फायरिंग करने के वीडियो सबूत के तौर पर डीएम, एसपी, डीजीपी और मुख्यमंत्री को भेजे हैं और आरोपियों के अवैध असलहों के लाइसेंस रद्द करने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या दोषियों पर कोई सख्त कदम उठाया जाता है।