जीपुर। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक ने बताया कि केंद्रीय बजट 2025-26 में भारत के अन्नदाताओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। सरकार की कृषि विकास और उत्पादकता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है, क्योंकि कृषि को दस प्रमुख विकासात्मक क्षेत्रों में शामिल किया गया है। यह कदम भारत की आर्थिक प्रगति को गति देने वाले एक महत्वपूर्ण इंजन के रूप में कार्य करेगा।
बजट के बाद वेबिनार का आयोजन
केंद्रीय बजट 2025-26 की घोषणाओं के कार्यान्वयन पर चर्चा करने के लिए 01 मार्च 2025 को “कृषि और ग्रामीण समृद्धि पर बजट के बाद वेबिनार” (Post-Budget Webinar on Agriculture & Rural Prosperity) का आयोजन किया गया। इस वेबिनार का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री द्वारा किया गया और इसकी अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के विभिन्न विभागों के सचिवों ने की।
इस कार्यक्रम में आरबीआई (RBI), नाबार्ड (NABARD), अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCB), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), राज्य सहकारी और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (StCB और DCCB), राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियां (SLBC), कृषि विकास केंद्र (KVK) और देशभर के किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए।
किसानों को मिलेगा आसान और सस्ता ऋण
आर्थिक सर्वेक्षण 2024 के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक 7.75 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) खाते संचालित हो रहे हैं। केसीसी योजना ने कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सरकार ने केसीसी-संशोधित ब्याज अनुदान योजना (KCC-MISS) के तहत किसानों को 4% की प्रभावी रियायती ब्याज दर पर ऋण देने की घोषणा की है। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जमानत मुक्त KCC ऋण की सीमा ₹1.6 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी है। वहीं, केंद्रीय बजट 2025-26 में संशोधित ब्याज सहायता योजना (MISS) के तहत ऋण सीमा को ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया गया है। इस कदम से छोटे और सीमांत किसानों को वित्तीय राहत मिलेगी और कृषि में अधिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इससे फसल उत्पादन, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
कृषि ऋण में ऐतिहासिक बढ़ोतरी का लक्ष्य
पिछले दशकों में सरकार ने MISS योजना के तहत किसानों को 1.44 लाख करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है। इसके साथ ही, सरकार का लक्ष्य 2023-24 में कृषि अल्पकालिक ऋण को 9.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2029-30 तक 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इन पहलों के माध्यम से सरकार न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की सुलभता बढ़ा रही है, बल्कि किसानों को वित्तीय स्वतंत्रता भी प्रदान कर रही है। यह योजना देशभर में कृषि ऋण की परिभाषा को नए सिरे से गढ़ने में सक्षम होगी और यह सुनिश्चित करेगी कि समय पर और किफायती ऋण उन्हीं किसानों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।