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खरीफ सीजन में 1.94 लाख हेक्टेयर में होगी फसल की बुवाई, धान की खेती का क्षेत्रफल सर्वाधिक

ब्यूरो 19-06-2025

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गाजीपुर। जनपद में खरीफ सीजन 2025 के लिए 1,94,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलों की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें अकेले धान की खेती 1,63,000 हेक्टेयर में की जाएगी, जो कुल क्षेत्रफल का लगभग 85% है। दलहन की खेती 8,000 हेक्टेयर, तिलहन 1,500 हेक्टेयर और मिलेट्स 18,000 हेक्टेयर में की जानी है। धान की बुवाई जिले के सभी विकास खण्डों में होती है, लेकिन प्रमुख रूप से जमानिया, भदौरा और रेवतीपुर क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होती है। इन क्षेत्रों में खेती अन्य विकास खंडों की अपेक्षा देर से शुरू होती है, जिससे यहां उर्वरकों की मांग भी अपेक्षाकृत देर से प्रारंभ होती है। इसके विपरीत जखनियां, सैदपुर, सादात, मरदह, मोहम्मदाबाद, भांवरकोल, बाराचवर, बिरनों, सदर व मनिहारी क्षेत्रों में धान की बुवाई शीघ्र प्रारंभ होती है, और उर्वरकों की आपूर्ति भी किसानों की मांग के अनुसार पहले की जाती है।

उर्वरक की वर्तमान स्थिति और आपूर्ति व्यवस्था
जनपद में वर्तमान में निजी और सहकारी क्षेत्र को मिलाकर लगभग 25,000 मैट्रिक टन यूरिया, 6,000 मैट्रिक टन डीएपी, 5,000 मैट्रिक टन एनपीके, 3,800 मैट्रिक टन एसएसपी तथा 1,000 मैट्रिक टन पोटाश का भंडारण किया गया है। इन उर्वरकों की नियमित आपूर्ति सप्लाई प्लान के अनुसार जारी है।पिछले वर्ष 2024 में अप्रैल व मई माह में यूरिया की खपत क्रमशः 1004 व 1123 मैट्रिक टन रही थी, जबकि इस वर्ष 2025 में यह बढ़कर क्रमशः 907 व 1313 मैट्रिक टन हो गई है। इसी प्रकार डीएपी की खपत क्रमशः 152 व 440 मैट्रिक टन रही, जो कि पिछले वर्ष से 562 मैट्रिक टन अधिक है। सहकारिता क्षेत्र में 1 अप्रैल से 15 जून 2025 तक 680 मैट्रिक टन यूरिया व 559 मैट्रिक टन डीएपी वितरित किया गया है।

गुणवत्ता और रेट में कोई अंतर नहीं
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निजी और सहकारी क्षेत्र द्वारा आपूर्ति किए जा रहे उर्वरकों की गुणवत्ता व दर में कोई अंतर नहीं है। दोनों के समान मानक निर्धारित हैं, अतः किसानों को किसी प्रकार के भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए।

सीमा क्षेत्रों में सतर्कता के निर्देश
गाजीपुर के पांच विकास खंड – जमानिया, रेवतीपुर, भदौरा, मोहम्मदाबाद और भांवरकोल – बिहार की सीमा से सटे होने के कारण इन क्षेत्रों में उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध परिवहन की आशंका रहती है। इसे रोकने के लिए निर्देश दिए गए हैं कि इन क्षेत्रों में केवल फसल की समयावधि में ही उर्वरक की आपूर्ति की जाए।

प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हेतु पीएम-प्रणाम योजना

रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा, वायु और जल प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है। इस पर नियंत्रण के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 से “पीएम-प्रणाम योजना” लागू की गई है। योजना का उद्देश्य यूरिया व डीएपी की खपत को घटाकर उनके विकल्प जैसे नैनो यूरिया, एनपीके, नैनो डीएपी, एसएसपी आदि को बढ़ावा देना है ताकि उत्पादन लागत भी कम की जा सके।

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