गाजीपुर। लंबे समय से उठ रही विश्वविद्यालय स्थापना की मांग ने मंगलवार को नया मोड़ ले लिया, जब मुख्यमंत्री के आगमन से पहले छात्र नेता दीपक उपाध्याय को नजरबंद कर दिया गया। दीपक उपाध्याय विश्वविद्यालय की मांग को लेकर सक्रिय रूप से जनप्रतिनिधियों और युवाओं के बीच अभियान चला रहे थे।
विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर गाजीपुर के छात्र-छात्राओं और युवाओं में वर्षों से आशा थी कि उनके जिले को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नया आयाम मिलेगा। लेकिन अब, छात्र नेताओं पर की जा रही कार्यवाही ने युवाओं में आक्रोश भर दिया है। नज़रबंदी की सूचना मिलते ही सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड करने लगा। जगह-जगह छात्र संगठनों और युवाओं ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि “क्या गाजीपुर में विश्वविद्यालय मांगना गुनाह है?” कई छात्रों ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की शिक्षा से जुड़ी मांगों को दबाने का प्रयास कर रही है। “गाजीपुर का सबसे बड़ा सवाल दबाने की कोशिश हो रही है,” एक स्थानीय छात्र ने कहा।
छात्र नेता दीपक उपाध्याय की नजरबंदी पर अभी तक जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह कदम कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के नाम पर उठाया गया है। हालांकि, इस कार्रवाई से गाजीपुर के युवाओं में असंतोष और गहरा गया है। अब यह केवल एक विश्वविद्यालय की मांग नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और युवाओं की लोकतांत्रिक आवाज़ के अधिकार का प्रश्न बन गया है। क्या विश्वविद्यालय की मांग उठाना अपराध बन चुका है? यह सवाल अब गाजीपुर की गलियों से निकलकर प्रदेश भर में गूंजने लगा है।