गाजीपुर। संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण को लेकर गाजीपुर में कृषि विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। इसी क्रम में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 25 जून 2025 को कृषि भवन सभागार में किया गया, जिसमें विभाग के सभी क्षेत्रीय कार्मिकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने बताया कि विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी 01 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक द्वितीय चरण के तहत संचारी रोगों की रोकथाम हेतु विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि चूहे एवं छछूदर संचारी रोगों के प्रमुख कारक हैं और इनके प्रभावी नियंत्रण के लिए कृषक समुदाय की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
चूहों-छछूदरों से निपटने के उपाय बताए गए
प्रशिक्षण में बताया गया कि चूहों के नियंत्रण के लिए निम्न उपायों का पालन किया जाए:
ब्रोमोडियोलॉन 0.005% युक्त चारे की 10 ग्राम मात्रा या
जिंक फास्फाइड (80%) की 1 ग्राम मात्रा को 48 ग्राम भूने चने में सरसों के तेल के साथ मिलाकर चारा तैयार करें और उसे बिलों में रखें। इसके अतिरिक्त एल्यूमिनियम फास्फाइड (56%) की 3-4 ग्राम मात्रा को चूहे के बिल में डालकर बिल को बंद करें। इससे निकलने वाली फॉस्फीन गैस से चूहे मर जाते हैं।
पौधरोपण से मच्छर व रोग नियंत्रण की अपील
कार्यक्रम में क्षेत्रीय कर्मचारियों से अपील की गई कि वे न्याय पंचायत स्तर पर छोटी गोष्ठियों का आयोजन करें और किसानों को लेवेंडर, नीम, तुलसी, लेमनग्रास और गेंदा जैसे मच्छररोधी पौधों के रोपण के लिए प्रेरित करें।
वैज्ञानिकों ने दिए अहम सुझाव
प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित कृषि वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि चूहों और छछूदरों की आदतों की जानकारी होने पर किसान न केवल अपनी फसलों बल्कि अपने स्वास्थ्य की भी रक्षा कर सकते हैं।
डॉ. ओमकार सिंह ने सुझाव दिया कि किसान अपने अनाज भंडारण के लिए लोहे की बखारी का प्रयोग करें जिससे चूहों/छछूदरों का प्रभावी नियंत्रण संभव हो सके।
अधिकारी भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी सचिन कुमार मिश्रा, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक राजनाथ सिंह यादव, अशोक कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने संचारी रोगों की रोकथाम और जनजागरूकता बढ़ाने के लिए अपने-अपने सुझाव साझा किए। कृषि विभाग का यह प्रयास न केवल फसल की रक्षा करेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले रोगों के प्रसार को भी प्रभावी रूप से रोकने में सहायक सिद्ध होगा।