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सौरभ साहित्य परिषद बरूइन के तत्वावधान में कवि गोष्ठी आयोजित, समाज और देशप्रेम पर  जोरदार प्रस्तुतियाँ

ब्यूरो 30-06-2025

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जमानियां (गाजीपुर)। क्षेत्र के ग्राम बरूइन स्थित साहित्यकार राजेन्द्र सिंह के आवास पर सौरभ साहित्य परिषद बरूइन के तत्वावधान में सोमवार को एक भव्य कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन में दूर-दूर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर भी तीखे एवं भावुक कव्य प्रस्तुत किए।बगोष्ठी का शुभारंभ शिक्षक कपिलदेव सिंह एवं अन्य आमंत्रित अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के तैल चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात कवि कामेश्वर द्विवेदी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई।

इस दौरान कवि गोपाल गौरव ने अपनी रचना “पैगामे मुहब्बत का मेरे ये सिला दिया, आंखों को मेरी खून का आंसू रुला दिया” सुनाकर श्रोताओं को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया। वहीं कवि मदन गोपाल सिन्हा ने “जेलर ने एक बार फिर किया नमस्कार और पूछा, अब कब दर्शन देंगे सरकार” जैसी पंक्तियों से आज की सामाजिक व्यवस्था पर व्यंग्य किया और खूब तालियाँ बटोरीं। कवि अक्षय पाण्डेय ने “एक पल तू गीत जैसा मन बना ले, संग मेरे गुनगुना ले” गीत सुनाकर महफिल को संगीतमय बना दिया। कार्यक्रम के मेजबान साहित्यकार राजेन्द्र सिंह ने “लोग आपस में यहाँ जलने लगे हैं, साँप अब आस्तीन में पलने लगे हैं” जैसी रचना से सम-सामयिक समाज की स्थिति पर बेबाक टिप्पणी की।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे कवि मिथिलेश गहमरी ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविता “ये कौमो-मिल्लतों-मज़हब के ठेकेदार क्या जानें, मोहब्बत वालों से तुम पूछो हिन्दुस्तान का मतलब” प्रस्तुत कर श्रोताओं में जोश भर दिया। कवि कामेश्वर द्विवेदी ने भावुक पंक्तियाँ “अधरों पे अमृत व गरल हृदय में है, हो गया कठिन पहचान पाना आदमी का” के माध्यम से मानवीय द्वंद्व को उजागर किया। कवि हरिशंकर पाण्डेय की रचना “असहाय पिता और बेबस पिता, दिल के हालात खुद जानता है पिता” ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। कवि रमेश सिंह की कविता “कवि तलवार की धार है, नाव की पतवार है” ने माहौल में जोश भर दिया और उन्होंने भरपूर सराहना पाई।

इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से पूर्व प्रधानाचार्य छेदी सिंह, पूर्व प्रधानाध्यापक रामअवतार सिंह, डॉ. सुरेश राय, मनोज पाण्डेय, जितेन्द्र सिंह, प्रधानाध्यापक संतोष सिंह पिन्टू, रणविजय सिंह, अमरेन्द्र सिंह, अमरनाथ सिंह झुन्ना, प्रमोद यादव, मुन्ना सिंह, संतोष शर्मा, विकास सिंह, मयूर सिंह आदि सम्मिलित थे। कार्यक्रम का समापन करतल ध्वनि एवं साहित्यप्रेमियों की सराहना के साथ हुआ। आयोजकों ने ऐसे आयोजन भविष्य में भी जारी रखने का संकल्प लिया।

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