गाजीपुर। खरीफ फसल के मद्देनज़र किसानों को समय पर और उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनपद गाजीपुर में डीएपी उर्वरक का वितरण प्रारंभ कर दिया गया है। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार जमाखोरी, कालाबाजारी और टैगिंग जैसी अनियमितताओं पर सख्त रोक लगाते हुए पॉस मशीन के माध्यम से 100 प्रतिशत उर्वरक वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जनपद की तीन तहसीलों के कुल 103 सहकारी समितियों पर कुल 996 मैट्रिक टन डीएपी का आवंटन किया गया है:
तहसील सदर:
विकास खंड सदर की 15 समितियों को 180 मैट्रिक टन
करंडा की 10 समितियों को 120 मैट्रिक टन
बिरनों की 13 समितियों को 156 मैट्रिक टन
मरदह की 10 समितियों को 96 मैट्रिक टन
तहसील मुहम्मदाबाद:
मुहम्मदाबाद की 16 समितियों को 120 मैट्रिक टन
बाराचवर की 11 समितियों को 120 मैट्रिक टन
भावरकोल की 11 समितियों को 60 मैट्रिक टन
तहसील कासिमाबाद:
विकास खंड कासिमाबाद की 17 समितियों को 144 मैट्रिक टन
प्रत्येक विकास खंड में खंड विकास अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। उर्वरकों का वितरण उनके सत्यापन के उपरांत ही किया जा रहा है। शेष विकास खंडों में भी जिलाधिकारी द्वारा आवंटन उपरांत शीघ्र ही डीएपी का प्रेषण किया जाएगा।जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरकों का क्रय एवं प्रयोग वैज्ञानिक संस्तुतियों के अनुसार ही करें। आवश्यकता से अधिक उर्वरक न केवल लागत बढ़ाता है, बल्कि मृदा, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव डालता है।कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि वे हरी खाद, कंपोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे जैविक व आधुनिक विकल्पों का अधिकाधिक उपयोग करें ताकि खेती की उत्पादकता के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता भी बनी रहे। जनपद में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। किसान भाई किसी भी अफवाह से प्रभावित न हों और शासन द्वारा निर्धारित दरों पर ही उर्वरक प्राप्त करें।