गाजीपुर। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जनपद के सभी विकास खंडों में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सघन निगरानी अभियान चलाया गया। इस अभियान के अंतर्गत जिला कृषि अधिकारी तथा सहायक विकास अधिकारियों ने विभिन्न बाजारों और दुकानों का निरीक्षण किया। जिला कृषि अधिकारी द्वारा नंदगंज बाजार, सिरगिथा बाजार, सैदपुर और औड़िहार क्षेत्र में निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान इन क्षेत्रों में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता पाई गई। सभी दुकानदारों को निर्देशित किया गया कि उर्वरकों का वितरण पॉस मशीन के माध्यम से किया जाए और किसानों को उनकी जोत के अनुसार ही उर्वरक प्रदान किया जाए। निरीक्षण के दौरान मेसर्स देवराज इंटरप्राइजेज (सिरगिथा बाजार), श्रीकृष्णा फर्टिलाइजर (औड़िहार) तथा किसान खाद भंडार (कुसुम्ही खुर्द) सहित अन्य दुकानों का भी दौरा किया गया। इस दौरान दो दुकानों के उर्वरक संदिग्ध पाए जाने पर नमूने एकत्र किए गए।
वहीं, अपर जिला कृषि अधिकारी द्वारा विकास खंड सादात और कासिमाबाद में निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान मेसर्स नीतिश एग्री जंक्शन, मकदूमपुर तथा मेसर्स बबलू खाद बीज भंडार, कासिमाबाद की दुकानें बंद पाई गईं, जिनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। निरीक्षण के दौरान तीन दुकानों के उर्वरक नमूने और लिए गए। इस सघन अभियान में जनपद भर से कुल 09 नमूने संग्रहित किए गए हैं। नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात संदिग्ध दुकानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उर्वरकों की स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया गया कि जनपद की 120 साधन सहकारी समितियों पर 1364 मीट्रिक टन यूरिया तथा 52 समितियों पर 624 मीट्रिक टन डीएपी का प्रेषण हो चुका है। शेष समितियों को शीघ्र उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है।
दिनांक 08 जुलाई 2025 तक जनपद में निम्नलिखित उर्वरकों की उपलब्धता दर्ज की गई है:
यूरिया – 27932 मीट्रिक टन
डीएपी – 7680 मीट्रिक टन
एमओपी – 1065 मीट्रिक टन
एनपीके – 5617 मीट्रिक टन
एसएसपी – 4180 मीट्रिक टन
किसानों से अपील की गई है कि वे वैज्ञानिक संस्तुतियों के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करें तथा आवश्यकता से अधिक उर्वरकों के प्रयोग से बचें, क्योंकि इससे न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि पर्यावरण और मृदा की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही, हरी खाद, कम्पोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नैनो डीएपी व नैनो यूरिया के प्रयोग को भी प्रोत्साहित किया गया है, जिससे खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ हो सके।