जमानिया (गाजीपुर)। तहसील क्षेत्र के कस्बा बाजार निवासी पुरुषोत्तम चौरसिया के पुत्र कैप्टन प्रशांत चौरसिया (25 वर्ष) ने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए वीरगति प्राप्त की। देहरादून में विशेष सैन्य प्रशिक्षण के दौरान एक साथी जवान की जान बचाते हुए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। इस हृदयविदारक घटना से पूरे जनपद में शोक की लहर दौड़ गई।

परिजनों के अनुसार, 20 मार्च 2026 को प्रशिक्षण के दौरान नदी पार करने का अभ्यास चल रहा था। इसी दौरान एक जवान तेज बहाव में फंस गया। स्थिति को देखते हुए कैप्टन प्रशांत बिना देर किए नदी में कूद पड़े और अपने साथी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि इस दौरान वे स्वयं तेज बहाव में अनियंत्रित होकर पत्थर से टकरा गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। अस्पताल में दो दिनों तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद 22 मार्च की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। कैप्टन प्रशांत अपने माता-पिता की तीन संतानों में मंझले थे। बड़ी बहन सोनाली की हाल ही में शादी हुई है, जबकि छोटा भाई मयंक घर पर रहकर पिता का सहयोग करता है। पिता पुरुषोत्तम चौरसिया पान के थोक व्यवसायी हैं। बेटे की शहादत की खबर मिलते ही मां सुमन देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लग गया।

शहीद का पार्थिव शरीर दोपहर करीब 1:30 बजे पैतृक आवास पहुंचा, जहां अंतिम दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ी। इसके बाद नगर के बलुआ घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि पिता ने दी।अंतिम यात्रा में उपजिलाधिकारी ज्योति चौरसिया, तहसीलदार रामनरायण वर्मा, प्रभारी निरीक्षक रामसजन नागर, पूर्व विधायक सुनीता सिंह, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष एहसान जफर सहित भूतपूर्व सैनिक संगठन के सदस्य एवं क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। कैप्टन प्रशांत चौरसिया का यह बलिदान न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गाजीपुर और देश के लिए गौरव और प्रेरणा का अमर उदाहरण बन गया है।